Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Aug 2023 · 3 min read

*”हरियाली तीज”*

“हरियाली तीज”
सावन मास व हरियाली तीज का बहुत महत्वपूर्ण संजोग है एक दूसरे के साथ में गहरा संबंध है और सावन मास के त्यौहार एक संगम जैसा है जो हरियाली अमावस्या पर्व से इसकी शुरुआत हो जाती है ।
सभी त्यौहार सावन मास की हरियाली अमावस्या तिथि से श्री गणेश हो जाता है फिर साल भर उत्सवों पर्वो का सिलसिला चलता रहता है।
सावन माह में बारिश होने से चहुँ ओर हरियाली मानो ऐसी लगती है जैसे हरी चुनरिया ओढ़ कर हरित धरा पर स्वागत कर रही हो।
हरियाली देखकर मन के अंदर नई ऊर्जा का संचार होने लगता है हरियाली तीज धार्मिक सांस्कृतिक विरासत की धरोहर है।
तीज पर सुहागिन महिलाएं शिव पार्वती का पूजन आराधना कर दाम्पत्य जीवन के लिए सुख शांति की कामना करते हैं।
हरियाली तीज के मौके पर मोहल्ले की सखी सहेलियाँ समूह बनाकर शिव पार्वती का पूजन करते हैं।एक दूसरे के साथ में जुड़कर रिश्तों में ताजगी आ जाती है।
ये सावन मास का त्यौहार पीहर याने मायका से जोड़ता है। शादीशुदा सुहागन महिलाएं सावन मास का विशेष तौर से प्रतीक्षा करती है।
घर गृहस्थी बसाने के बाद अक्सर मायका छूट सा जाता है शादी के कुछ दिनों तक आना जाना लगे रहता है फिर बाद में घर परिवार की जिम्मेदारी में उलझ कर मायका जाने का सुअवसर खोजते ही रहती है और सावन माह में हरियाली तीज से रक्षाबंधन पर्व पर भाई व पिता की आने की बाट जोहते रहती है।
“अम्माँ मेरे बाबा को भेजो री कि सावन आया है”
प्रतीक्षा का अंत तब होता है जब कोई मायके से लेने आता है। मायके पहुँचकर भाई बहनों ,माता पिता के साथ जो स्नेह प्रेम मिलता है उसे बयां नही किया जा सकता है।
पेड़ो पर झूले डाल ,सोलह श्रृंगार कर हरी चुनरिया ओढे झूला झूलते हुए सखियाँ कजरिया गाती हैं। एक दूसरे से अपने मन की बातें साझा करती है।
*”झूला झूल रही सखियाँ ,झूला पेंग बार बार।
नाच उठे अनगिनत मयूर वन में इठलाकर*
अंबर पर इंद्रधनुष रंग लहराया
सावन आयो री ……….
इस तरह से नारी के जीवन में हर्षोल्लास होकर ऊर्जावान हो जाती है मन प्रफुल्लित हो उठता है।
हरियाली तीज का संदेश –
पीहर जाने की खुशी तो बहुत होती है साथ ही साथ मन उमंगों तरंगों से भर जाता है चेहरा खिल उठता है। इस तीज के पर्व माध्यम से महिलाएं जीवन साथी के प्रति प्रेम को अभिव्यक्त करती है। इससे पता चलता है कि दाम्पत्य जीवन हमेशा खुशहाल रहेगा।
देवी पार्वती जी ने कठोर तपस्या कर शिव जी को प्राप्त किया था उनमें प्रेम समर्पण भाव व विश्वास था कि वह शिव जी की अर्धाग्नि बनी जबकि शिव जी तो बैरागी थे उन्होंने पार्वती जी को समझाया था कि वह महलों में रहने वाली रानी राजकुमारी है कैलाश पर्वत पर सुख सुविधाएं उपलब्ध नहीं है विहीन जीवन कैसे जी सकती हो लेकिन पार्वती जी हर चीजों को त्यागकर शिव जी को पाने के लिए सभी सुख सुविधाओं को त्यागने को तैयार हो गई थी।
आखिर माता पार्वती जी का प्रेम विजयी हुआ उन्होंने शिव जी को सदा के लिए अपना बना लिया था।
इसी तरह शिव पार्वती जी ने अपने दाम्पत्य जीवन की नींव रखी थी दोनों एक दूसरे के प्रति समर्पण भाव ही था जो अलग अलग प्रकृति के होने के बाद भी एकाकार हो गए थे।
शिव पार्वती को आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक माना गया है।यदि इसी तरह से समर्पण भाव प्रेम स्नेहिलप्रेम हर दांपत्य जीवन में आत्मसात कर ले तो दांपत्य जीवन सुखी व खुशहाल बना रहेगा।
आज हम इन संस्कृति को भूलते जा रहे हैं ।भले ही पूरे विधि विधान से यह पर्व नही मना सकते हैं लेकिन आधुनिक शैली में यह बिसार देते हैं।
हरियाली तीज के अवसर पर कई जगहों में भव्य आयोजन झूला डालकर किये जाते हैं महिलाएं गीत गाती हैं और एक दूसरे को झूला झुलाती है नृत्य करती है और सभी सखी सहेलियाँ मिल जाती है तो तीज के हर्षोल्लास उमंगों में डूब जाती है।
सावन मास का महत्व को समझें जिससे आने वाले जीवन में उल्लासपूर्ण वातावरण बना रहे और भारतीय संस्कृति व परम्पराओं से जुडे रहे ताकि जो हमारे घर परिवार ,कुटुंब समाज को बांधे रखता है इसके कारण जीवन का अमूल्य धरोहर बची रहे और सुखी जीवन खुशहाल हो सके।
शशिकला व्यास
📝🖋

1 Like · 1 Comment · 222 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
आप देखिएगा...
आप देखिएगा...
*प्रणय प्रभात*
2767. *पूर्णिका*
2767. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
तोड़ कर खुद को
तोड़ कर खुद को
Dr fauzia Naseem shad
*पल में बारिश हो रही, पल में खिलती धूप (कुंडलिया)*
*पल में बारिश हो रही, पल में खिलती धूप (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
शव शरीर
शव शरीर
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
आँखें उदास हैं - बस समय के पूर्णाअस्त की राह ही देखतीं हैं
आँखें उदास हैं - बस समय के पूर्णाअस्त की राह ही देखतीं हैं
Atul "Krishn"
बेशक मैं उसका और मेरा वो कर्जदार था
बेशक मैं उसका और मेरा वो कर्जदार था
हरवंश हृदय
शमशान और मैं l
शमशान और मैं l
सेजल गोस्वामी
पहाड़ पर बरसात
पहाड़ पर बरसात
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
गोंडवाना गोटूल
गोंडवाना गोटूल
GOVIND UIKEY
इंसान
इंसान
विजय कुमार अग्रवाल
रात
रात
SHAMA PARVEEN
*लफ्ज*
*लफ्ज*
Kumar Vikrant
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रीतम श्रावस्तवी
सुन्दरता।
सुन्दरता।
Anil Mishra Prahari
लफ्ज़ों की जिद्द है कि
लफ्ज़ों की जिद्द है कि
Shwet Kumar Sinha
"हाशिया"
Dr. Kishan tandon kranti
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
संविधान को अपना नाम देने से ज्यादा महान तो उसको बनाने वाले थ
संविधान को अपना नाम देने से ज्यादा महान तो उसको बनाने वाले थ
SPK Sachin Lodhi
बचपन अपना अपना
बचपन अपना अपना
Sanjay ' शून्य'
विभेद दें।
विभेद दें।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
जिंदगी में अपने मैं होकर चिंतामुक्त मौज करता हूं।
जिंदगी में अपने मैं होकर चिंतामुक्त मौज करता हूं।
Rj Anand Prajapati
अन्त हुआ सब आ गए, झूठे जग के मीत ।
अन्त हुआ सब आ गए, झूठे जग के मीत ।
sushil sarna
बुद्धिमान हर बात पर, पूछें कई सवाल
बुद्धिमान हर बात पर, पूछें कई सवाल
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Now we have to introspect how expensive it was to change the
Now we have to introspect how expensive it was to change the
DrLakshman Jha Parimal
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Tarun Singh Pawar
किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?
किन्तु क्या संयोग ऐसा; आज तक मन मिल न पाया?
संजीव शुक्ल 'सचिन'
तेरी मुहब्बत से, अपना अन्तर्मन रच दूं।
तेरी मुहब्बत से, अपना अन्तर्मन रच दूं।
Anand Kumar
दिल धोखे में है
दिल धोखे में है
शेखर सिंह
Loading...