Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Aug 2023 · 1 min read

हरियाली के बीच में , माँ का पकड़े हाथ ।

हरियाली के बीच में , माँ का पकड़े हाथ ।
नन्हा पौधा पल्लवित, जैसे धरती साथ ॥
जैसे धरती साथ, ज्ञान के पथ पर चलता ।
पहला दिन है आज, साथ गुरु प्रथम निकलता ॥
होगा इक दिन खास , ज्ञान से पुष्पित डाली।
सुरभित कर आकाश ,बढ़ायेगा हरियाली ॥

1 Like · 168 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Mahendra Narayan
View all
You may also like:
कि दे दो हमें मोदी जी
कि दे दो हमें मोदी जी
Jatashankar Prajapati
!! मन रखिये !!
!! मन रखिये !!
Chunnu Lal Gupta
क्योंकि मैं किसान हूँ।
क्योंकि मैं किसान हूँ।
Vishnu Prasad 'panchotiya'
नारी के चरित्र पर
नारी के चरित्र पर
Dr fauzia Naseem shad
क्या हिसाब दूँ
क्या हिसाब दूँ
हिमांशु Kulshrestha
* straight words *
* straight words *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
अभिव्यक्ति
अभिव्यक्ति
Punam Pande
कुछ तो नशा जरूर है उनकी आँखो में,
कुछ तो नशा जरूर है उनकी आँखो में,
Vishal babu (vishu)
3056.*पूर्णिका*
3056.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सनातन संस्कृति
सनातन संस्कृति
Bodhisatva kastooriya
"क्लियोपेट्रा"
Dr. Kishan tandon kranti
सुबह की चाय हम सभी पीते हैं
सुबह की चाय हम सभी पीते हैं
Neeraj Agarwal
अहंकार का एटम
अहंकार का एटम
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
■ धन्य हो मूर्धन्यों!
■ धन्य हो मूर्धन्यों!
*Author प्रणय प्रभात*
चाय का निमंत्रण
चाय का निमंत्रण
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
माँ महान है
माँ महान है
Dr. Man Mohan Krishna
*मैं और मेरी तन्हाई*
*मैं और मेरी तन्हाई*
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
दिलो को जला दे ,लफ्ज़ो मैं हम वो आग रखते है ll
दिलो को जला दे ,लफ्ज़ो मैं हम वो आग रखते है ll
गुप्तरत्न
*बहुत कठिन डगर जीवन की*
*बहुत कठिन डगर जीवन की*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
तेरे बिन घर जैसे एक मकां बन जाता है
तेरे बिन घर जैसे एक मकां बन जाता है
Bhupendra Rawat
विकास
विकास
Dr. Pradeep Kumar Sharma
विनम्रता, साधुता दयालुता  सभ्यता एवं गंभीरता जवानी ढलने पर आ
विनम्रता, साधुता दयालुता सभ्यता एवं गंभीरता जवानी ढलने पर आ
Rj Anand Prajapati
हिंदी मेरी माँ
हिंदी मेरी माँ
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
*भीड़ में चलते रहे हम, भीड़ की रफ्तार से (हिंदी गजल)*
*भीड़ में चलते रहे हम, भीड़ की रफ्तार से (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
शोख लड़की
शोख लड़की
Ghanshyam Poddar
सामाजिक मुद्दों पर आपकी पीड़ा में वृद्धि हुई है, सोशल मीडिया
सामाजिक मुद्दों पर आपकी पीड़ा में वृद्धि हुई है, सोशल मीडिया
Sanjay ' शून्य'
जय श्रीराम हो-जय श्रीराम हो।
जय श्रीराम हो-जय श्रीराम हो।
manjula chauhan
ग़म भूल जाइए,होली में अबकी बार
ग़म भूल जाइए,होली में अबकी बार
Shweta Soni
गति साँसों की धीमी हुई, पर इंतज़ार की आस ना जाती है।
गति साँसों की धीमी हुई, पर इंतज़ार की आस ना जाती है।
Manisha Manjari
दौर ऐसा हैं
दौर ऐसा हैं
SHAMA PARVEEN
Loading...