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9 Oct 2022 · 1 min read

सुबह की एक किरण

सुबह की एक किरण,
भोर का संदेशा लाई !

रात काली थी मगर ,
देखो अजब सवेरा लाई !

चिड़िया का पहचाना ,
कोयल- राग सुनाना !

कल-कल करती नदियां ,
फूलों का खिल जाना !

नई उमंग नया सवेरा ,
नई – नई तरंग लाई !

नई ऊर्जा , नया है जुनून
मन में नया उत्साह लाई !

कहीं जेहन में दबे हुए
नए-नए वो स्वप्न आई !

सुबह की एक किरण,
भोर का संदेशा लाई !

✍कवि दीपक सरल

Language: Hindi
Tag: Poem
3 Likes · 289 Views
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