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17 Dec 2022 · 1 min read

सामन्ती संस्कार

सप्तरी राजबिराजको एउटा चिया पसलमा चियाको पर्खाईमा थिएँ ।
बाहिर चिया पिउनेहरूको बाक्लै भिड थियो ।
सबै आ-आफ्नो पालो कुर्दै थिए ।
अचेल चियामा पनि विविधता जो प्रचलनमा छ ।
कसैलाई कडा रंग, कोहीलाई फिक्का, दूध चिया त कोहीलाई सुगर फ्रि …..! चिया पसलेलाई अर्डर बमोजिमको चिया बनाउन भ्याइ न भ्याई थियो ।
उता चियाका पर्खाईमा रहेकाहरू थरी -थरीका गप्प चुट्न भ्याई रहेका थिए ।
म भने चिया पसलेको बॉस टाँटघरामा बसेर सबै सुनिरहेको थिएँ ।
एउटा स्कूले उमेरका बालकले अर्डर गर्नेहरूसम्म एक-एक गरी चिया पुर्याई रहेका थिए । तिनले अर्डर दिनेको अनुहार हेर्दै चिया पस्किरहेका थिए । (त्यहॉ एउटा अचम्म त के लाग्यो भने ती बालकले अर्डर दिनेहरूलाई आबाजबाटै चिन्दा रै’छन् । तिनीमा गजबको प्रतिभा रै’छ ।)
गफगाफ चलिरहेकै थियो । गफ चुट्नमा व्यस्त हुनेहरूमध्ये कोहीले शिक्षा, त कोहीले विकासका कुरा गरिरहेका थिए ।
त्यहाँ अधिकारका कुरा गर्नेहरू पनि खुबै थिए ।
सबैले आ-आफ्नै तर्क दिँदै शिक्षा, विकास र अधिकारका कुरा चर्को आबाजमा गरिरहेकै थिए ।
त्यही आबाज बीच एउटा स्वर सुनियो –
‘रै छोटका दू कप चाह ला’ (ए सानो दुई कप चिया लेऊ) ।
शिक्षा र अधिकारको कुरा गर्नेहरूबाटै सुनेको यो सामन्ती सम्वोधन ‘रै छोट्का…!!!’ बाट मन कुडियो । :) #दिनेश_यादव #feeling

Language: Nepali
Tag: कथा
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