Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Aug 2023 · 2 min read

साथ

साथ

‘बेटा, पिछले तीन घंटे में तुम हमें तीन शो-रूम घुमा चुके हो। तुम्हारी तीनों शार्टलिस्टेड कारों में एक बात कॉमन है कि कार सेवन सीटर है। क्या जरूरत है बड़ी कार की ? तुम तीनों के लिए तो फाइव सीटर कार ही सफिसिएंट है ?” शर्मा जी ने समझाते हुए कहा।
“नहीं पापा, जब मम्मी और आप आएँगे, तो फाइव सीटर गाड़ी छोटी पड़ेगी। इसलिए बस मेरी शार्टलिस्टेड एक और गाड़ी देख लीजिए। फिर हम इतमीनान से बैठकर डिसकसन कर डिसाइड करेंगे कि कौन सी गाड़ी खरीदें ?” रमेश ने कहा।
“लेकिन बेटा, तुम्हारी मम्मी और मैं तो कभी-कभी ही आएँगे शहर। गाँव में मुझे अपनी नौकरी भी तो करनी है। हमारे कुछ ही दिनों के लिए यूँ… ?” शर्मा जी कुछ और भी बोलना चाहते हैं।
“हम जानते हैं पापा जी, आपको अपनी नौकरी करनी है। चार महीने बाद जब आप रिटायर होंगे, तो उसके बाद हम आपको और मम्मी जी को वहाँ गाँव में रहने थोड़े न देंगे। यदि आप शहर शिफ्ट न हुए, तो हम अपनी-अपनी नौकरी छोड़कर गाँव शिफ्ट हो जाएँगे और वहीं छोटा-मोटा कोई काम धंधा देख कर लेंगे।” इस बार शर्मा जी की बात काटते हुए उनकी बहु नेहा ने कहा।
“लेकिन बेटा…।”
“पापा जी, मुझे सब कुछ मालूम है कि आपने रमेश जी की बेहतर पढ़ाई के लिए उन्हें माँजी के साथ शहर भेज दिया था और खुद गाँव में अकेले रह गए थे। अब और हम यूँ अलग-अलग नहीं रह सकते।” नेहा ने कहा।
शर्मा जी की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने भीगे हुए स्वर में कहा, “ठीक है बेटा, हम आप लोगों के साथ शहर शिफ्ट हो जाएँगे, पर हमारी भी एक शर्त है।”
“शर्त ? कैसी शर्त पापा ?” रमेश और नेहा दोनों ने एक साथ पूछा।
“हमारी शर्त ये है कि हमारे साथ-साथ नेहा के पापा भी रहेंगे। अपनी रिटायरमेंट और समधन जी के स्वर्गवास के बाद हमारे समधी जी अकेले-से हो गए हैं। वे हमारे साथ ही रहेंगे, तो हमें भी कंपनी मिल जाएगी और नेहा बिटिया भी टेंशन फ्री रहेगी।” शर्मा जी ने कहा।
“आपके विचार बहुत अच्छे हैं पापा जी। पर मेरे पापा अपनी बेटी के घर रहना शायद पसंद नहीं करेंगे…” नेहा ने आशंका व्यक्त की।
“उसका टेंशन तुम न लो बेटी। यदि उन्होंने हमें अपनी बेटी दी है, तो हमने भी तो उन्हें अपना बेटा दिया है। और आजकल ये सब बातें अप्रासंगिक हो गई हैं। हम मॉडर्न युग के मम्मी-पापा हैं। समधी जी को आज ही से इंफार्म कर देते हैं, ताकि वे भी मेंटली प्रिपेयर हो सकें।” शर्मा जी ने उत्साहित होकर कहा।
रमेश अपने ससुर जी के नंबर पर डायल करने लगा।
– डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़

Language: Hindi
164 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ख़ुद से हमको
ख़ुद से हमको
Dr fauzia Naseem shad
3269.*पूर्णिका*
3269.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*गठरी धन की फेंक मुसाफिर, चलने की तैयारी है 【हिंदी गजल/गीतिक
*गठरी धन की फेंक मुसाफिर, चलने की तैयारी है 【हिंदी गजल/गीतिक
Ravi Prakash
पिता
पिता
Mamta Rani
क्या वैसी हो सच में तुम
क्या वैसी हो सच में तुम
gurudeenverma198
अरमान
अरमान
अखिलेश 'अखिल'
नारी जाति को समर्पित
नारी जाति को समर्पित
Juhi Grover
सफल
सफल
Paras Nath Jha
किसी तरह मां ने उसको नज़र से बचा लिया।
किसी तरह मां ने उसको नज़र से बचा लिया।
Phool gufran
टन टन बजेगी घंटी
टन टन बजेगी घंटी
SHAMA PARVEEN
■ एक शेर में जीवन दर्शन।
■ एक शेर में जीवन दर्शन।
*प्रणय प्रभात*
अगर हमारा सुख शान्ति का आधार पदार्थगत है
अगर हमारा सुख शान्ति का आधार पदार्थगत है
Pankaj Kushwaha
धरती के भगवान
धरती के भगवान
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Little Things
Little Things
Dhriti Mishra
"धीरे-धीरे"
Dr. Kishan tandon kranti
चाँदनी रातों में बसी है ख़्वाबों का हसीं समां,
चाँदनी रातों में बसी है ख़्वाबों का हसीं समां,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
उत्तम देह
उत्तम देह
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
पिता के नाम पुत्री का एक पत्र
पिता के नाम पुत्री का एक पत्र
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
6-जो सच का पैरोकार नहीं
6-जो सच का पैरोकार नहीं
Ajay Kumar Vimal
राजनीति में ना प्रखर,आते यह बलवान ।
राजनीति में ना प्रखर,आते यह बलवान ।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
होरी के हुरियारे
होरी के हुरियारे
Bodhisatva kastooriya
नींद आज नाराज हो गई,
नींद आज नाराज हो गई,
Vindhya Prakash Mishra
मन के भाव हमारे यदि ये...
मन के भाव हमारे यदि ये...
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
" सुन‌ सको तो सुनों "
Aarti sirsat
नज्म- नजर मिला
नज्म- नजर मिला
Awadhesh Singh
" मेरी ओकात क्या"
भरत कुमार सोलंकी
* राह चुनने का समय *
* राह चुनने का समय *
surenderpal vaidya
रात
रात
sushil sarna
मां शारदे वंदना
मां शारदे वंदना
Neeraj Agarwal
कभी रहे पूजा योग्य जो,
कभी रहे पूजा योग्य जो,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
Loading...