Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Oct 2016 · 1 min read

समझा है कभी नारी नज़ाकत को क्या– जितेन्द्र कमल आनंद ( ५३)

रुबाई :::
———-
समझा है कभी नारी नज़ाकत को क्या ।
समझा है कभी फौज़ी शहादत को क्या ।
ये सृजन , वो सुरक्षा ही किया करते हैं ।
समझा है इस अनमोल जरूरत को क्या ।।५३!!

—— जितेन्द्र कमल आनंद

Language: Hindi
1 Like · 257 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
■ हिंदी ग़ज़ल / वर्तमान
■ हिंदी ग़ज़ल / वर्तमान
*Author प्रणय प्रभात*
वह फिर से छोड़ गया है मुझे.....जिसने किसी और      को छोड़कर
वह फिर से छोड़ गया है मुझे.....जिसने किसी और को छोड़कर
Rakesh Singh
जन्नतों में सैर करने के आदी हैं हम,
जन्नतों में सैर करने के आदी हैं हम,
लवकुश यादव "अज़ल"
“ फेसबुक के दिग्गज ”
“ फेसबुक के दिग्गज ”
DrLakshman Jha Parimal
वक़्त ने हीं दिखा दिए, वक़्त के वो सारे मिज़ाज।
वक़्त ने हीं दिखा दिए, वक़्त के वो सारे मिज़ाज।
Manisha Manjari
*जीवन्त*
*जीवन्त*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जिन्दगी कभी नाराज होती है,
जिन्दगी कभी नाराज होती है,
Ragini Kumari
विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
लोकेश शर्मा 'अवस्थी'
अकेली औरत
अकेली औरत
Shekhar Chandra Mitra
सावन में संदेश
सावन में संदेश
Er.Navaneet R Shandily
*दुनिया से जब जाऊँ तो क्या, छोड़ूँ क्या ले जाऊँ( हिंदी गजल/गी
*दुनिया से जब जाऊँ तो क्या, छोड़ूँ क्या ले जाऊँ( हिंदी गजल/गी
Ravi Prakash
गुरु नानक देव जी --
गुरु नानक देव जी --
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
पेइंग गेस्ट
पेइंग गेस्ट
Dr. Pradeep Kumar Sharma
महंगाई के इस दौर में भी
महंगाई के इस दौर में भी
Kailash singh
हम सब में एक बात है
हम सब में एक बात है
Yash mehra
बेटियां
बेटियां
Neeraj Agarwal
मैंने तो ख़ामोश रहने
मैंने तो ख़ामोश रहने
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मन तेरा भी
मन तेरा भी
Dr fauzia Naseem shad
शराब हो या इश्क़ हो बहकाना काम है
शराब हो या इश्क़ हो बहकाना काम है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Aadarsh Dubey
शायद कुछ अपने ही बेगाने हो गये हैं
शायद कुछ अपने ही बेगाने हो गये हैं
Ravi Ghayal
अधूरे सवाल
अधूरे सवाल
Shyam Sundar Subramanian
रिश्तों की बंदिशों में।
रिश्तों की बंदिशों में।
Taj Mohammad
गुफ्तगू तुझसे करनी बहुत ज़रूरी है ।
गुफ्तगू तुझसे करनी बहुत ज़रूरी है ।
Phool gufran
युग परिवर्तन
युग परिवर्तन
आनन्द मिश्र
इसरो के हर दक्ष का,
इसरो के हर दक्ष का,
Rashmi Sanjay
इस छोर से.....
इस छोर से.....
Shiva Awasthi
23/188.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/188.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*हिंदी मेरे देश की जुबान है*
*हिंदी मेरे देश की जुबान है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
आशाओं के दीप जलाए थे मैने
आशाओं के दीप जलाए थे मैने
Ram Krishan Rastogi
Loading...