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22 Dec 2022 · 1 min read

शायरी

वो बात कुछ और थी, आज बात कुछ और हैं l
वो रात कुछ और थी, आज ताप कुछ और हैं ll
हमें लगा कि, जमाना बदल रहा l
बदकिस्मत मुहब्बत यहां तो, शमियाना ही बदल रहा ll

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