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28 Jun 2023 · 1 min read

रूप जिसका आयतन है, नेत्र जिसका लोक है

रूप जिसका आयतन है, नेत्र जिसका लोक है
ज्योति जिसका हृदय है, जो हरण करता शोक है
नमन बारम्बार उसको क्यों न मेरा मन करे
वह साथ दे तो प्रगति से कोई न सकता रोक है
— महेशचन्द्र त्रिपाठी

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