Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jan 2024 · 1 min read

रिश्तों में वक्त

रिश्तों में वक्त
रिश्तों में वक्त नहीं है,अब उम्मीद नहीं दिखती,
मन से जुड़ाव बनेगा मजबूत,बस रिश्ते हैं तो जी रहे हैं साथ।
रिश्ते के साए में,वरना जसब्बती बैठक,
अब काफी दिनों के सफर में,कभी-कभी जब इल्म लगता है,
तो बैठ जाते हैं,रिश्ते के नाम पर।
आज कल के लोगों के बनाए रिश्ते,बस एक दिखावा हैं,
नहीं है उनमें कोई दम,नहीं है उनमें कोई जान।
इन रिश्तों में,नहीं है कोई प्यार,
नहीं है कोई विश्वास,नहीं है कोई सम्मान।
इन रिश्तों में,बस है एक दिखावा,
और एक नकली दुनिया

74 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
“फेसबूक का व्यक्तित्व”
“फेसबूक का व्यक्तित्व”
DrLakshman Jha Parimal
उनकी जब ये ज़ेह्न बुराई कर बैठा
उनकी जब ये ज़ेह्न बुराई कर बैठा
Anis Shah
कहने को हर हाथ में,
कहने को हर हाथ में,
sushil sarna
निराशा क्यों?
निराशा क्यों?
Sanjay ' शून्य'
प्रेम ईश्वर प्रेम अल्लाह
प्रेम ईश्वर प्रेम अल्लाह
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अमृत उद्यान
अमृत उद्यान
मनोज कर्ण
"दुम"
Dr. Kishan tandon kranti
यादों पर एक नज्म लिखेंगें
यादों पर एक नज्म लिखेंगें
Shweta Soni
अवसर
अवसर
संजय कुमार संजू
कठिन परिश्रम साध्य है, यही हर्ष आधार।
कठिन परिश्रम साध्य है, यही हर्ष आधार।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
दो धारी तलवार
दो धारी तलवार
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
नारी तुम
नारी तुम
Anju ( Ojhal )
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
आशीर्वाद
आशीर्वाद
Dr Parveen Thakur
विद्या:कविता
विद्या:कविता
rekha mohan
*भूमिका*
*भूमिका*
Ravi Prakash
खता खतों की नहीं थीं , लम्हों की थी ,
खता खतों की नहीं थीं , लम्हों की थी ,
Manju sagar
"भीमसार"
Dushyant Kumar
मैं गर्दिशे अय्याम देखता हूं।
मैं गर्दिशे अय्याम देखता हूं।
Taj Mohammad
आदित्य(सूरज)!
आदित्य(सूरज)!
Abhinay Krishna Prajapati-.-(kavyash)
"A Dance of Desires"
Manisha Manjari
2717.*पूर्णिका*
2717.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हार का पहना हार
हार का पहना हार
Sandeep Pande
"आशा" के दोहे '
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
Sandeep Mishra
मैं
मैं
Seema gupta,Alwar
बाल कविता: वर्षा ऋतु
बाल कविता: वर्षा ऋतु
Rajesh Kumar Arjun
खुद को परोस कर..मैं खुद को खा गया
खुद को परोस कर..मैं खुद को खा गया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
बढ़ी शय है मुहब्बत
बढ़ी शय है मुहब्बत
shabina. Naaz
◆आज की बात◆
◆आज की बात◆
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...