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3 Jun 2016 · 1 min read

*रहमत*

सहरा भी गुलज़ार हैं होते
दरिया ग़म के पार हैं होते
खुदा की होती जब है रहमत
उन्नति के आसार हैं होते

*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
379 Views
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