Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Apr 2023 · 1 min read

रंग आख़िर किसलिए

रंग आख़िर किसलिए
मद का चढ़ा है ये कहो!
एक हद के बाद क़द
किसका बढ़ा है ये कहो!!

■प्रणय प्रभात■

1 Like · 329 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
2893.*पूर्णिका*
2893.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
गहरी हो बुनियादी जिसकी
गहरी हो बुनियादी जिसकी
कवि दीपक बवेजा
जयंत (कौआ) के कथा।
जयंत (कौआ) के कथा।
Acharya Rama Nand Mandal
* जिसने किए प्रयास *
* जिसने किए प्रयास *
surenderpal vaidya
वर्षा ऋतु के बाद
वर्षा ऋतु के बाद
लक्ष्मी सिंह
Decision making is backed by hardwork and courage but to cha
Decision making is backed by hardwork and courage but to cha
Sanjay ' शून्य'
मां
मां
Slok maurya "umang"
फिर भी तो बाकी है
फिर भी तो बाकी है
gurudeenverma198
“ जियो और जीने दो ”
“ जियो और जीने दो ”
DrLakshman Jha Parimal
किया पोषित जिन्होंने, प्रेम का वरदान देकर,
किया पोषित जिन्होंने, प्रेम का वरदान देकर,
Ravi Yadav
मोहब्बत
मोहब्बत
अखिलेश 'अखिल'
चांदनी की झील में प्यार का इज़हार हूँ ।
चांदनी की झील में प्यार का इज़हार हूँ ।
sushil sarna
मेला
मेला
Dr.Priya Soni Khare
जिस प्रकार इस धरती में गुरुत्वाकर्षण समाहित है वैसे ही इंसान
जिस प्रकार इस धरती में गुरुत्वाकर्षण समाहित है वैसे ही इंसान
Rj Anand Prajapati
कविता: जर्जर विद्यालय भवन की पीड़ा
कविता: जर्जर विद्यालय भवन की पीड़ा
Rajesh Kumar Arjun
विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता
विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
फलों से लदे वृक्ष सब को चाहिए, पर बीज कोई बनना नहीं चाहता। क
फलों से लदे वृक्ष सब को चाहिए, पर बीज कोई बनना नहीं चाहता। क
पूर्वार्थ
19. कहानी
19. कहानी
Rajeev Dutta
जब तुमने सहर्ष स्वीकारा है!
जब तुमने सहर्ष स्वीकारा है!
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
*कभी मिटा नहीं पाओगे गाँधी के सम्मान को*
*कभी मिटा नहीं पाओगे गाँधी के सम्मान को*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
जिसनें जैसा चाहा वैसा अफसाना बना दिया
जिसनें जैसा चाहा वैसा अफसाना बना दिया
Sonu sugandh
तय
तय
Ajay Mishra
*जिंदगी में जब मिले सुख-दुख पिता की याद आई (गीत )*
*जिंदगी में जब मिले सुख-दुख पिता की याद आई (गीत )*
Ravi Prakash
Hum tumhari giraft se khud ko azad kaise kar le,
Hum tumhari giraft se khud ko azad kaise kar le,
Sakshi Tripathi
आदर्श
आदर्श
Bodhisatva kastooriya
माँ वो है जिसे
माँ वो है जिसे
shabina. Naaz
आसमान में बादल छाए
आसमान में बादल छाए
Neeraj Agarwal
सभी नेतागण आज कल ,
सभी नेतागण आज कल ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
धूतानां धूतम अस्मि
धूतानां धूतम अस्मि
DR ARUN KUMAR SHASTRI
रात के अंँधेरे का सौंदर्य वही बता सकता है जिसमें बहुत सी रात
रात के अंँधेरे का सौंदर्य वही बता सकता है जिसमें बहुत सी रात
Neerja Sharma
Loading...