Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 May 2022 · 1 min read

यादें आती हैं

ये जिंदगी बहुत छोटी हैं
हर लम्हा जी भर जियो….
लौट कर सिर्फ
यादें आती हैं वक़्त नहीं….
– कृष्ण सिंह

Language: Hindi
4 Likes · 2 Comments · 595 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जवानी
जवानी
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
संवेदना अभी भी जीवित है
संवेदना अभी भी जीवित है
Neena Kathuria
नाही काहो का शोक
नाही काहो का शोक
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
घर की गृहलक्ष्मी जो गृहणी होती है,
घर की गृहलक्ष्मी जो गृहणी होती है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
Exploring the Vast Dimensions of the Universe
Exploring the Vast Dimensions of the Universe
Shyam Sundar Subramanian
शाकाहारी
शाकाहारी
डिजेन्द्र कुर्रे
भूखे हैं कुछ लोग !
भूखे हैं कुछ लोग !
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
सूरज नमी निचोड़े / (नवगीत)
सूरज नमी निचोड़े / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
■ क़तआ (मुक्तक)
■ क़तआ (मुक्तक)
*प्रणय प्रभात*
आया बाढ़ पहाड़ पे🙏
आया बाढ़ पहाड़ पे🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
पतग की परिणीति
पतग की परिणीति
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
আমি তোমাকে ভালোবাসি
আমি তোমাকে ভালোবাসি
Otteri Selvakumar
सबूत- ए- इश्क़
सबूत- ए- इश्क़
राहुल रायकवार जज़्बाती
नारी : एक अतुल्य रचना....!
नारी : एक अतुल्य रचना....!
VEDANTA PATEL
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
लौट कर वक्त
लौट कर वक्त
Dr fauzia Naseem shad
पत्रकारिता सामाजिक दर्पण
पत्रकारिता सामाजिक दर्पण
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
इसकी वजह हो तुम, खता मेरी नहीं
इसकी वजह हो तुम, खता मेरी नहीं
gurudeenverma198
अपनी बुरी आदतों पर विजय पाने की खुशी किसी युद्ध में विजय पान
अपनी बुरी आदतों पर विजय पाने की खुशी किसी युद्ध में विजय पान
Paras Nath Jha
"मेरी कहानी"
Dr. Kishan tandon kranti
मौत
मौत
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
आप चाहे किसी भी धर्म को मानते हों, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
आप चाहे किसी भी धर्म को मानते हों, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
Jogendar singh
अब ये ना पूछना कि,
अब ये ना पूछना कि,
शेखर सिंह
रविदासाय विद् महे, काशी बासाय धी महि।
रविदासाय विद् महे, काशी बासाय धी महि।
गुमनाम 'बाबा'
आज यादों की अलमारी खोली
आज यादों की अलमारी खोली
Rituraj shivem verma
*जीवन-नौका चल रही, सदा-सदा अविराम(कुंडलिया)*
*जीवन-नौका चल रही, सदा-सदा अविराम(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
गौरवशाली भारत
गौरवशाली भारत
Shaily
खुद पर यकीन,
खुद पर यकीन,
manjula chauhan
एक खाली बर्तन,
एक खाली बर्तन,
नेताम आर सी
तुम बिन रहें तो कैसे यहां लौट आओ तुम।
तुम बिन रहें तो कैसे यहां लौट आओ तुम।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...