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20 Feb 2024 · 1 min read

मैंने आईने में जब भी ख़ुद को निहारा है

मैंने आईने में जब भी ख़ुद को निहारा है
उतनी दफा मैंने तुझ को पुकारा है
अग़्यारों के बीच असफ़ार में रह कर
तेरी जूस्तजू मैं मैंने दिन अपना गुज़ारा है

1 Like · 223 Views
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