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Jul 24, 2016 · 1 min read

मुक्तक

चिराग जल रहें हैं रोशनी की ख्वाहिश में
किसी को क्या पता है दर्द क्या नुमाइश में
हमें पता है इश्क का मुकाम क्या होगा
हमें तो आ रहा है लुत्फ आज़माईश में

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