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24 Jan 2023 · 1 min read

मुक्तक

हरिद्वार जाकर गंगा में ,तन को अपने धो लेते।
कष्ट दूर हो जाते सारे ,नींद चैन की सो लेते।
हँसना अपनी मजबूरी है ,गैरों के सँग रहते हैं,
अपनों का कंधा मिलता तो,हम भी खुलकर रो लेते।
डाॅ बिपिन पाण्डेय

Language: Hindi
2 Likes · 208 Views
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