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Feb 27, 2019 · 1 min read

मुक्तक

मेरे शब्द वो चीख़ है जो हर जख्म पे निकल आती है
तू वो हाकिम है जिसके सीने में धडकता दिल ही नहीं।
मौत नंगी नाचती रही हर दिन घर -आंगन में हमारे
आहो की आवाज़ हमारी क्या कानों तक तेरे जाती है ?
।।सिद्धार्थ।।

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