Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Jul 2023 · 1 min read

मात पिता को तुम भूलोगे

मात पिता को तुम भूलोगे
पुत्र सदा तुम्हें भी भूलेगा
वृद्धाश्रम भेजोगे उनको
तुम्हें सड़क पर वो छोड़ेगा !!@ परिमल

345 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*जिंदगी के अनोखे रंग*
*जिंदगी के अनोखे रंग*
Harminder Kaur
"नजरों से न गिरना"
Dr. Kishan tandon kranti
समय से पहले
समय से पहले
अंजनीत निज्जर
Global climatic change and it's impact on Human life
Global climatic change and it's impact on Human life
Shyam Sundar Subramanian
जिन्दगी की धूप में शीतल सी छाव है मेरे बाऊजी
जिन्दगी की धूप में शीतल सी छाव है मेरे बाऊजी
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
नयनों का वार
नयनों का वार
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मसरुफियत में आती है बे-हद याद तुम्हारी
मसरुफियत में आती है बे-हद याद तुम्हारी
Vishal babu (vishu)
2900.*पूर्णिका*
2900.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
फिजा में तैर रही है तुम्हारी ही खुशबू।
फिजा में तैर रही है तुम्हारी ही खुशबू।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
"एहसासों के दामन में तुम्हारी यादों की लाश पड़ी है,
Aman Kumar Holy
कई लोगों के दिलों से बहुत दूर हुए हैं
कई लोगों के दिलों से बहुत दूर हुए हैं
कवि दीपक बवेजा
*वर्ष दो हजार इक्कीस (छोटी कहानी))*
*वर्ष दो हजार इक्कीस (छोटी कहानी))*
Ravi Prakash
कहानी - आत्मसम्मान)
कहानी - आत्मसम्मान)
rekha mohan
मैं उनके सँग में यदि रहता नहीं
मैं उनके सँग में यदि रहता नहीं
gurudeenverma198
रेत मुट्ठी से फिसलता क्यूं है
रेत मुट्ठी से फिसलता क्यूं है
Shweta Soni
आप जितने सकारात्मक सोचेंगे,
आप जितने सकारात्मक सोचेंगे,
Sidhartha Mishra
माँ महान है
माँ महान है
Dr. Man Mohan Krishna
* मुक्तक *
* मुक्तक *
surenderpal vaidya
लगता है आवारगी जाने लगी है अब,
लगता है आवारगी जाने लगी है अब,
Deepesh सहल
*हे महादेव आप दया के सागर है मैं विनती करती हूं कि मुझे क्षम
*हे महादेव आप दया के सागर है मैं विनती करती हूं कि मुझे क्षम
Shashi kala vyas
टाँगतोड़ ग़ज़ल / MUSAFIR BAITHA
टाँगतोड़ ग़ज़ल / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
#मसखरी...
#मसखरी...
*Author प्रणय प्रभात*
आया तीजो का त्यौहार
आया तीजो का त्यौहार
Ram Krishan Rastogi
जय शिव-शंकर
जय शिव-शंकर
Anil Mishra Prahari
दलित साहित्य के महानायक : ओमप्रकाश वाल्मीकि
दलित साहित्य के महानायक : ओमप्रकाश वाल्मीकि
Dr. Narendra Valmiki
दासता
दासता
Bodhisatva kastooriya
जब  सारे  दरवाजे  बंद  हो  जाते  है....
जब सारे दरवाजे बंद हो जाते है....
shabina. Naaz
DR ARUN KUMAR SHASTRI
DR ARUN KUMAR SHASTRI
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बदलाव
बदलाव
Dr fauzia Naseem shad
माँ
माँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Loading...