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29 Sep 2022 · 1 min read

माँ कूष्माण्डा

पावन मन से पूजते, चौथे माँ का रूप।
मुखमंडल तेजोमयी, है सौंदर्य अनूप ।।
है सौंदर्य अनूप, प्रकाशित जग यह सारा ।
बाण धनुष है हाथ, आपसे रिपुदल हारा ।।
है कूष्माण्डा नाम, रूप माँ का मनभावन ।
‘वंदन’ बारंबार, दिवस नौ दिन हैं पावन ।।

वन्दना नामदेव

1 Like · 341 Views
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