Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Feb 2024 · 1 min read

मन में एक खयाल बसा है

मन में एक खयाल बसा है
और उस खयाल से मन मेरा बहुत उदास है
ना जाने क्यों दूर होकर भी तू मेरे पास है
मेरी चाहत है तू फिर भी मैं तुझसे दूर जाना चाहता हूं
जो ख़्वाब सच नहीं हो सकता
उस ख़्वाब से दूर जाना चाहता हूं
जो खयाल बसा है मन में उसे मैं भूल जाना चाहता हूं
मैं कैसे समझाऊं अपने प्यार को
कि मैं तुझे कितना चाहता हूं।

138 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
नींद ( 4 of 25)
नींद ( 4 of 25)
Kshma Urmila
मै ज़िन्दगी के उस दौर से गुज़र रहा हूँ जहाँ मेरे हालात और मै
मै ज़िन्दगी के उस दौर से गुज़र रहा हूँ जहाँ मेरे हालात और मै
पूर्वार्थ
"तेरे लिए.." ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
अगन में तपा करके कुंदन बनाया,
अगन में तपा करके कुंदन बनाया,
Satish Srijan
जग जननी है जीवनदायनी
जग जननी है जीवनदायनी
Buddha Prakash
युवा है हम
युवा है हम
Pratibha Pandey
हकीकत
हकीकत
Dr. Seema Varma
राष्ट्रपिता
राष्ट्रपिता
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
हास्य का प्रहार लोगों पर न करना
हास्य का प्रहार लोगों पर न करना
DrLakshman Jha Parimal
आम का मौसम
आम का मौसम
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
पतंग
पतंग
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
रमेशराज की कविता विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की कविता विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
नज़र नज़र का फर्क है साहेब...!!
नज़र नज़र का फर्क है साहेब...!!
Vishal babu (vishu)
"मानद उपाधि"
Dr. Kishan tandon kranti
मौन
मौन
निकेश कुमार ठाकुर
बेटियों को मुस्कुराने दिया करो
बेटियों को मुस्कुराने दिया करो
Shweta Soni
चाहत
चाहत
Shyam Sundar Subramanian
■ लघुकथा
■ लघुकथा
*Author प्रणय प्रभात*
बाल दिवस विशेष- बाल कविता - डी के निवातिया
बाल दिवस विशेष- बाल कविता - डी के निवातिया
डी. के. निवातिया
बिन माचिस के आग लगा देते हैं
बिन माचिस के आग लगा देते हैं
Ram Krishan Rastogi
3071.*पूर्णिका*
3071.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कर्मठ राष्ट्रवादी श्री राजेंद्र कुमार आर्य
कर्मठ राष्ट्रवादी श्री राजेंद्र कुमार आर्य
Ravi Prakash
हम बेजान हैं।
हम बेजान हैं।
Taj Mohammad
जिस्म का खून करे जो उस को तो क़ातिल कहते है
जिस्म का खून करे जो उस को तो क़ातिल कहते है
shabina. Naaz
कुछ लोगों का प्यार जिस्म की जरुरत से कहीं ऊपर होता है...!!
कुछ लोगों का प्यार जिस्म की जरुरत से कहीं ऊपर होता है...!!
Ravi Betulwala
विषय :- रक्त रंजित मानवीयता रस-वीभत्स रस विधा-मधुमालती छंद आधारित गीत मापनी-2212 , 2212
विषय :- रक्त रंजित मानवीयता रस-वीभत्स रस विधा-मधुमालती छंद आधारित गीत मापनी-2212 , 2212
Neelam Sharma
क्षणिकाएँ. .
क्षणिकाएँ. .
sushil sarna
" तेरा एहसान "
Dr Meenu Poonia
जै जै अम्बे
जै जै अम्बे
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
प्रीत ऐसी जुड़ी की
प्रीत ऐसी जुड़ी की
Seema gupta,Alwar
Loading...