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20 Dec 2022 · 1 min read

*मद्धिम प्रातः काल (कुंडलिया)*

मद्धिम प्रातः काल (कुंडलिया)
_________________________
छाया कुहरा शीत का, मद्धिम प्रातः काल
सूरज दुल्हन-सा दिखा, मानों घूॅंघट डाल
मानों घूॅंघट डाल, सुबह है खोई-खोई
सोया जैसे विश्व, नदारद है हर कोई
कहते रवि कविराय, मजा अद्भुत है आया
जाड़ों में अनमोल, दृश्य यह अनुपम छाया
_______________________
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

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