Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jun 2023 · 1 min read

भारी संकट नीर का, जग में दिखता आज ।

भारी संकट नीर का, जग में दिखता आज ।
रक्षा यदि हम नहि किए,रक्षित नही समाज ॥
रक्षित नही समाज, रहेगा भूखा प्यासा ।
जल जीवन आधार ,नही हो जीवन आशा ॥
करती नही उपाय , कहे बस दुनिया सारी।
कैसे मिलेगा शुद्ध , वारि का संकट भारी ॥

393 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Mahendra Narayan
View all
You may also like:
बेकरार दिल
बेकरार दिल
Ritu Asooja
मन को एकाग्र करने वाले मंत्र जप से ही काम सफल होता है,शांत च
मन को एकाग्र करने वाले मंत्र जप से ही काम सफल होता है,शांत च
Shashi kala vyas
अभी कैसे हिम्मत हार जाऊं मैं ,
अभी कैसे हिम्मत हार जाऊं मैं ,
शेखर सिंह
अलाव की गर्माहट
अलाव की गर्माहट
Arvina
Holding onto someone who doesn't want to stay is the worst h
Holding onto someone who doesn't want to stay is the worst h
पूर्वार्थ
बुंदेली दोहा संकलन बिषय- गों में (मन में)
बुंदेली दोहा संकलन बिषय- गों में (मन में)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
खुले लोकतंत्र में पशु तंत्र ही सबसे बड़ा हथियार है
खुले लोकतंत्र में पशु तंत्र ही सबसे बड़ा हथियार है
प्रेमदास वसु सुरेखा
सफर 👣जिंदगी का
सफर 👣जिंदगी का
डॉ० रोहित कौशिक
जीभ
जीभ
विजय कुमार अग्रवाल
"भँडारे मेँ मिलन" हास्य रचना
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
जब बूढ़ी हो जाये काया
जब बूढ़ी हो जाये काया
Mamta Rani
*जाना सबके भाग्य में, कहॉं अयोध्या धाम (कुंडलिया)*
*जाना सबके भाग्य में, कहॉं अयोध्या धाम (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
हिस्से की धूप
हिस्से की धूप
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
पापा के वह शब्द..
पापा के वह शब्द..
Harminder Kaur
मर्यादा पुरुषोत्तम राम
मर्यादा पुरुषोत्तम राम
Ramji Tiwari
जीवन के पल दो चार
जीवन के पल दो चार
Bodhisatva kastooriya
मैं अपने लिए नहीं अपनों के लिए जीता हूं मेरी एक ख्वाहिश है क
मैं अपने लिए नहीं अपनों के लिए जीता हूं मेरी एक ख्वाहिश है क
Ranjeet kumar patre
कुछ शब्द
कुछ शब्द
Vivek saswat Shukla
24/230. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/230. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
"सच की सूरत"
Dr. Kishan tandon kranti
अयोध्या धाम
अयोध्या धाम
Mukesh Kumar Sonkar
■ नाकारों से क्या लगाव?
■ नाकारों से क्या लगाव?
*प्रणय प्रभात*
गौ माता...!!
गौ माता...!!
Ravi Betulwala
विडम्बना
विडम्बना
Shaily
पहले एक बात कही जाती थी
पहले एक बात कही जाती थी
DrLakshman Jha Parimal
डिग्रीया तो बस तालीम के खर्चे की रसीदें है,
डिग्रीया तो बस तालीम के खर्चे की रसीदें है,
Vishal babu (vishu)
बहुत दिनों के बाद मिले हैं हम दोनों
बहुत दिनों के बाद मिले हैं हम दोनों
Shweta Soni
बिछड़ के नींद से आँखों में बस जलन होगी।
बिछड़ के नींद से आँखों में बस जलन होगी।
Prashant mishra (प्रशान्त मिश्रा मन)
मुक्ति मिली सारंग से,
मुक्ति मिली सारंग से,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बासी रोटी...... एक सच
बासी रोटी...... एक सच
Neeraj Agarwal
Loading...