Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Sep 2016 · 1 min read

भारत मेरा महान् (देशगान)

उन्‍नत भाल हिमालय सुरसरि, गंगा जिसकी आन।
उन्‍मुक्‍त तिरंगा शान्ति-दूत बन, देता है संज्ञान।
चक्र सुदर्शन सा लहराए, करता है गुणगान।
चहूँ दिशा पहुँचेगी मेरे, भारत की पहचान।।

महाभारत, रामायण्‍ा, गीता, जन-गण-मन सा गान।
ताजमहल भी बना मेरे, भारत का अ‍मिट निशान।
महिला शक्त्‍िा बन उभरीं, महामहिम भारत की शान।
अद्वितीय, अजेय, अनूठा ही है, भारत मेरा महान्।

यह वो देश है जहाँँ से दुनिया ने, शून्‍य को जाना।
खेल, पर्यटन और फिल्‍मों से, है जिसको पहचाना।
अंतरिक्ष पहुँच और तकनीकी, प्रतिभाओं से विश्‍व भी माना।
बिना रक्‍त क्रांति के जिसने, पहना स्‍वाधीनी बाना।

भाषा का सिरमौर, सभ्‍यता, संस्‍कार, सम्‍मान।
न्‍याय और आतिथ्‍य हैं मेरे, भाारत के परिधान।
विज्ञान, ज्ञान, संगीत मिला, आध्‍यात्‍म गुरू का मान।
ऐसे भारत को ‘आकुल’ का, शत-शत बार प्रणाम।।

(मेरेे काव्‍य संग्रह ‘जीवन की गूँज’ से)

Language: Hindi
Tag: गीत
321 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"कुछ अगर -मगर, कुछ काश में रहे...."
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
सच्चाई ~
सच्चाई ~
दिनेश एल० "जैहिंद"
*पहले वाले  मन में हैँ ख़्यालात नहीं*
*पहले वाले मन में हैँ ख़्यालात नहीं*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
गुज़रते वक्त ने
गुज़रते वक्त ने
Dr fauzia Naseem shad
नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा
नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा
Shashi kala vyas
Life isn't all about dating. Focus on achieving your goals a
Life isn't all about dating. Focus on achieving your goals a
पूर्वार्थ
सरस्वती वंदना
सरस्वती वंदना
Satya Prakash Sharma
3234.*पूर्णिका*
3234.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
किरणों का कोई रंग नहीं होता
किरणों का कोई रंग नहीं होता
Atul "Krishn"
करवा चौथ@)
करवा चौथ@)
Vindhya Prakash Mishra
होके रुकसत कहा जाओगे
होके रुकसत कहा जाओगे
Awneesh kumar
कविता: सपना
कविता: सपना
Rajesh Kumar Arjun
* पहचान की *
* पहचान की *
surenderpal vaidya
ना अब मनमानी करता हूं
ना अब मनमानी करता हूं
Keshav kishor Kumar
★ आज का मुक्तक
★ आज का मुक्तक
*प्रणय प्रभात*
Noone cares about your feelings...
Noone cares about your feelings...
Suryash Gupta
कोई यहां अब कुछ नहीं किसी को बताता है,
कोई यहां अब कुछ नहीं किसी को बताता है,
manjula chauhan
*श्रीराम और चंडी माँ की कथा*
*श्रीराम और चंडी माँ की कथा*
Kr. Praval Pratap Singh Rana
विपरीत परिस्थितियों में भी तुरंत फैसला लेने की क्षमता ही सफल
विपरीत परिस्थितियों में भी तुरंत फैसला लेने की क्षमता ही सफल
Paras Nath Jha
शिमले दी राहें
शिमले दी राहें
Satish Srijan
*पत्रिका समीक्षा*
*पत्रिका समीक्षा*
Ravi Prakash
वक्त अब कलुआ के घर का ठौर है
वक्त अब कलुआ के घर का ठौर है
Pt. Brajesh Kumar Nayak
जय श्री राम।
जय श्री राम।
Anil Mishra Prahari
****प्रेम सागर****
****प्रेम सागर****
Kavita Chouhan
साथ हो एक मगर खूबसूरत तो
साथ हो एक मगर खूबसूरत तो
ओनिका सेतिया 'अनु '
अनवरत ये बेचैनी
अनवरत ये बेचैनी
Shweta Soni
मंथन
मंथन
Shyam Sundar Subramanian
इंतज़ार
इंतज़ार
Dipak Kumar "Girja"
लोककवि रामचरन गुप्त मनस्वी साहित्यकार +डॉ. अभिनेष शर्मा
लोककवि रामचरन गुप्त मनस्वी साहित्यकार +डॉ. अभिनेष शर्मा
कवि रमेशराज
विवाह का आधार अगर प्रेम न हो तो वह देह का विक्रय है ~ प्रेमच
विवाह का आधार अगर प्रेम न हो तो वह देह का विक्रय है ~ प्रेमच
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
Loading...