Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Jan 2024 · 1 min read

बेशक कितने ही रहें , अश्व तेज़तर्रार

बेशक कितने ही रहें , अश्व तेज़तर्रार ।
बिना सारथी लक्ष्य का, पाना अति दुश्वार ।

खड़े सभी रथ खींचने, श्वेत अश्व तैयार ।
पता नहीं फिर सारथी, क्योंकर हुआ फरार ।।
रमेश शर्मा.

Language: Hindi
2 Likes · 102 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
माना   कि  बल   बहुत  है
माना कि बल बहुत है
Paras Nath Jha
ये जो मुस्कराहट का,लिबास पहना है मैंने.
ये जो मुस्कराहट का,लिबास पहना है मैंने.
शेखर सिंह
उसकी दहलीज पर
उसकी दहलीज पर
Satish Srijan
काली हवा ( ये दिल्ली है मेरे यार...)
काली हवा ( ये दिल्ली है मेरे यार...)
Manju Singh
रास्ते फूँक -फूँककर चलता  है
रास्ते फूँक -फूँककर चलता है
Anil Mishra Prahari
"बूढ़ा" तो एक दिन
*Author प्रणय प्रभात*
बेरोजगार लड़के
बेरोजगार लड़के
पूर्वार्थ
जवानी के दिन
जवानी के दिन
Sandeep Pande
*समझौता*
*समझौता*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
वो अपना अंतिम मिलन..
वो अपना अंतिम मिलन..
Rashmi Sanjay
फितरत
फितरत
kavita verma
बाल कविता मोटे लाला
बाल कविता मोटे लाला
Ram Krishan Rastogi
*मॉं : शत-शत प्रणाम*
*मॉं : शत-शत प्रणाम*
Ravi Prakash
अपना बिहार
अपना बिहार
AMRESH KUMAR VERMA
हर रिश्ता
हर रिश्ता
Dr fauzia Naseem shad
नौका विहार
नौका विहार
Dr Parveen Thakur
घर वापसी
घर वापसी
Aman Sinha
2586.पूर्णिका
2586.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
अजीब बात है
अजीब बात है
umesh mehra
उम्मीद
उम्मीद
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
थाल सजाकर दीप जलाकर रोली तिलक करूँ अभिनंदन ‌।
थाल सजाकर दीप जलाकर रोली तिलक करूँ अभिनंदन ‌।
Neelam Sharma
आखिर मैंने भी कवि बनने की ठानी MUSAFIR BAITHA
आखिर मैंने भी कवि बनने की ठानी MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
विचारों को पढ़ कर छोड़ देने से जीवन मे कोई बदलाव नही आता क्य
विचारों को पढ़ कर छोड़ देने से जीवन मे कोई बदलाव नही आता क्य
Rituraj shivem verma
"तलबगार"
Dr. Kishan tandon kranti
Chehre se sundar nhi per,
Chehre se sundar nhi per,
Vandana maurya
आखिरी दिन होगा वो
आखिरी दिन होगा वो
shabina. Naaz
ਯਾਦਾਂ ਤੇ ਧੁਖਦੀਆਂ ਨੇ
ਯਾਦਾਂ ਤੇ ਧੁਖਦੀਆਂ ਨੇ
Surinder blackpen
प्याली से चाय हो की ,
प्याली से चाय हो की ,
sushil sarna
माँ तस्वीर नहीं, माँ तक़दीर है…
माँ तस्वीर नहीं, माँ तक़दीर है…
Anand Kumar
Loading...