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6 May 2024 · 1 min read

बह्र 2122 1122 1122 22 अरकान-फ़ाईलातुन फ़यलातुन फ़यलातुन फ़ेलुन काफ़िया – अर रदीफ़ – की ख़ुशबू

गिरह
रंग औ नूर करिश्मा या इनायत रब की,
आज भी क़ैद है चंदन के शज़र की ख़ुशबू ।
१)
तेरी बाहों में गुजा़री शब- सहर की ख़ुशबू,
है हवाओं में घुली तेरे असर की खुशबू ।
२)
तेरी तस्वीर निगाहों से जिगर में उतरी,
मेरी साँसों में समाई है नज़र की ख़ुशबू ।
३)
देखते राह तिरी सूख गया मन उपवन,
गुल खिलाएगी आने की ख़बर की ख़ुशबू।
४)
मैं तो ख़ुशबू हूँ महकने से न रोके कोई
हम वतन जान जिगर औ रहबर की खुशबू ।
५)
मेरी रग – रग में समाई है वतन की उल्फ़त,
वो ख़यालों में मेरे शाम -ओ- सहर की ख़ुशबू।
६)
साथ थोड़ा ही सही साथ मिला तो ‘ नीलम’,
साथ जीवन में तिरा दुआओं में असर की खुशबू ।
नीलम शर्मा ✍️

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