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2 Jun 2023 · 1 min read

बहें हैं स्वप्न आँखों से अनेकों

बहें हैं स्वप्न आँखों से अनेकों
अब आँखों को बहाना पड़ रहा है
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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