Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Jul 2023 · 1 min read

बना एक दिन वैद्य का

बना एक दिन वैद्य का, कहे धरा का देव
इनके अंतस में छिपे, जानो सभी त्रिदेव
जानो सभी त्रिदेव, सब देवन पर भारी
हरते पूरे जग की ये सभी बीमारी सारी
कहे कुमार सुनो कुछ इसमे भी अपवाद
धन है केवल धर्म बना करते व्यर्थ विवाद।

निर्मेष

2 Comments · 148 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
View all
You may also like:
जोकर
जोकर
Neelam Sharma
विश्वास
विश्वास
धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफ़िर
#शख़्सियत...
#शख़्सियत...
*Author प्रणय प्रभात*
लोकतंत्र का महापर्व
लोकतंत्र का महापर्व
नवीन जोशी 'नवल'
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
The flames of your love persist.
The flames of your love persist.
Manisha Manjari
*पुस्तक समीक्षा*
*पुस्तक समीक्षा*
Ravi Prakash
हिंदी है पहचान
हिंदी है पहचान
Seema gupta,Alwar
झील बनो
झील बनो
Dr. Kishan tandon kranti
सीखा दे ना सबक ऐ जिंदगी अब तो, लोग हमको सिर्फ मतलब के लिए या
सीखा दे ना सबक ऐ जिंदगी अब तो, लोग हमको सिर्फ मतलब के लिए या
Rekha khichi
*** कभी-कभी.....!!! ***
*** कभी-कभी.....!!! ***
VEDANTA PATEL
तुम देखो या ना देखो, तराजू उसका हर लेन देन पर उठता है ।
तुम देखो या ना देखो, तराजू उसका हर लेन देन पर उठता है ।
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
छल ......
छल ......
sushil sarna
अभी दिल भरा नही
अभी दिल भरा नही
Ram Krishan Rastogi
ग़ज़ल कहूँ तो मैं ‘असद’, मुझमे बसते ‘मीर’
ग़ज़ल कहूँ तो मैं ‘असद’, मुझमे बसते ‘मीर’
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
डा. तुलसीराम और उनकी आत्मकथाओं को जैसा मैंने समझा / © डा. मुसाफ़िर बैठा
डा. तुलसीराम और उनकी आत्मकथाओं को जैसा मैंने समझा / © डा. मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
' पंकज उधास '
' पंकज उधास '
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
*खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति को देखकर खुद
*खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति को देखकर खुद
Shashi kala vyas
3379⚘ *पूर्णिका* ⚘
3379⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
प्यार
प्यार
लक्ष्मी सिंह
मेरे हमसफ़र
मेरे हमसफ़र
Sonam Puneet Dubey
अपने-अपने संस्कार
अपने-अपने संस्कार
Dr. Pradeep Kumar Sharma
(6) सूने मंदिर के दीपक की लौ
(6) सूने मंदिर के दीपक की लौ
Kishore Nigam
अपनी शान के लिए माँ-बाप, बच्चों से ऐसा क्यों करते हैं
अपनी शान के लिए माँ-बाप, बच्चों से ऐसा क्यों करते हैं
gurudeenverma198
हिंदी दिवस
हिंदी दिवस
Akash Yadav
प्रेम
प्रेम
Pratibha Pandey
मुद्रा नियमित शिक्षण
मुद्रा नियमित शिक्षण
AJAY AMITABH SUMAN
" पीती गरल रही है "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
न जाने वो कैसे बच्चे होंगे
न जाने वो कैसे बच्चे होंगे
Keshav kishor Kumar
हाथ में खल्ली डस्टर
हाथ में खल्ली डस्टर
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
Loading...