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14 Feb 2024 · 1 min read

बंसत पचंमी

बंसत पचंमी
ऋतु बसंत,समीर बहे
मधुर – मधुर सवंच्छद
नव पल्लव अंकुरित
पुष्प मरकंद.. मन प्रफुल्लित
सूर्य प्रकाश अद्भुत प्रसन्न अंतर्मन
आयो ऋतु बसंत
ज्ञानामृत बुद्धि, विवेक का
भण्डार हो
प्रकाश,ज्ञान कलश मां शारदा नमन
धन, वैभव सुख-सम्पत्ति लक्ष्मी
की पवित्र – पावन रश्मियां
नमों मां सरस्वती मां देवी
बुद्धि, वैभव सुख-समृद्धि
का प्रकाश हो.. आयो ऋतु बंसत

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