Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Jun 2023 · 1 min read

फिर बैठ गया हूं, सांझ के साथ

फिर बैठ गया हूं, सांझ के साथ
कल की सह में
झगड़ा कर बैठा, मैं आज के साथ
किसे सुनाऊं हाल मैं अपना
जब शिकवे हों, आप के साथ
फिर बैठ गया हूं सांझ के साथ

1 Like · 420 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दूर हमसे वो जब से जाने लगे हैंं ।
दूर हमसे वो जब से जाने लगे हैंं ।
Anil chobisa
*शाश्वत जीवन-सत्य समझ में, बड़ी देर से आया (हिंदी गजल)*
*शाश्वत जीवन-सत्य समझ में, बड़ी देर से आया (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
"खुद के खिलाफ़"
Dr. Kishan tandon kranti
सत्य
सत्य
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मतदान कीजिए (व्यंग्य)
मतदान कीजिए (व्यंग्य)
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
बह्र 2122 2122 212 फ़ाईलातुन फ़ाईलातुन फ़ाईलुन
बह्र 2122 2122 212 फ़ाईलातुन फ़ाईलातुन फ़ाईलुन
Neelam Sharma
सपना
सपना
ओनिका सेतिया 'अनु '
वक़्त की पहचान🙏
वक़्त की पहचान🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मोल नहीं होता है देखो, सुन्दर सपनों का कोई।
मोल नहीं होता है देखो, सुन्दर सपनों का कोई।
surenderpal vaidya
फलक भी रो रहा है ज़मीं की पुकार से
फलक भी रो रहा है ज़मीं की पुकार से
Mahesh Tiwari 'Ayan'
आओ चलें नर्मदा तीरे
आओ चलें नर्मदा तीरे
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
दूर क्षितिज तक जाना है
दूर क्षितिज तक जाना है
Neerja Sharma
दर्द ना अश्कों का है ना ही किसी घाव का है.!
दर्द ना अश्कों का है ना ही किसी घाव का है.!
शेखर सिंह
प्रेम में कुछ भी असम्भव नहीं। बल्कि सबसे असम्भव तरीक़े से जि
प्रेम में कुछ भी असम्भव नहीं। बल्कि सबसे असम्भव तरीक़े से जि
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
कलेजा फटता भी है
कलेजा फटता भी है
Paras Nath Jha
मन का मिलन है रंगों का मेल
मन का मिलन है रंगों का मेल
Ranjeet kumar patre
चौकड़िया छंद / ईसुरी छंद , विधान उदाहरण सहित , व छंद से सृजित विधाएं
चौकड़िया छंद / ईसुरी छंद , विधान उदाहरण सहित , व छंद से सृजित विधाएं
Subhash Singhai
!! एक ख्याल !!
!! एक ख्याल !!
Swara Kumari arya
दोहे- चार क़दम
दोहे- चार क़दम
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
" चुस्की चाय की संग बारिश की फुहार
Dr Meenu Poonia
बेचारे नेता
बेचारे नेता
गुमनाम 'बाबा'
माईया गोहराऊँ
माईया गोहराऊँ
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
अलार्म
अलार्म
Dr Parveen Thakur
बढ़ती हुई समझ,
बढ़ती हुई समझ,
Shubham Pandey (S P)
हे राम !
हे राम !
Ghanshyam Poddar
झुकाव कर के देखो ।
झुकाव कर के देखो ।
Buddha Prakash
धरती के सबसे क्रूर जानवर
धरती के सबसे क्रूर जानवर
*Author प्रणय प्रभात*
*कृष्ण की दीवानी*
*कृष्ण की दीवानी*
Shashi kala vyas
2953.*पूर्णिका*
2953.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हमारी मंजिल
हमारी मंजिल
Diwakar Mahto
Loading...