Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Jun 2016 · 1 min read

*पहचान*

खुद को जिसने जाना है !
खुदा को उसने जाना है !!

अपना सबको माना है !
फ़िर कोई नही बेगाना है !!

खुद को जिसने जाना है
खुदा को उसने जाना है !!

लबों पर यही तराना है !
सब कुछ आना जाना है !!

दुनियाँ मुसाफ़िरखाना है
सांसों का कर्ज़ चुकाना है!!

खुद को जिसने जाना है !
खुदा को उसने जाना है !!
धर्मेन्द्र अरोड़ा

Language: Hindi
Tag: गीत
584 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
ନୀରବତାର ବାର୍ତ୍ତା
ନୀରବତାର ବାର୍ତ୍ତା
Bidyadhar Mantry
पन्नें
पन्नें
Abhinay Krishna Prajapati-.-(kavyash)
सुनती हूँ
सुनती हूँ
Shweta Soni
बदली-बदली सी तश्वीरें...
बदली-बदली सी तश्वीरें...
Dr Rajendra Singh kavi
VISHAL
VISHAL
Vishal Prajapati
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
"आज और अब"
Dr. Kishan tandon kranti
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Sidhartha Mishra
वतन के लिए
वतन के लिए
नूरफातिमा खातून नूरी
मुक्तक
मुक्तक
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
बोलते हैं जैसे सारी सृष्टि भगवान चलाते हैं ना वैसे एक पूरा प
बोलते हैं जैसे सारी सृष्टि भगवान चलाते हैं ना वैसे एक पूरा प
Vandna thakur
चोट शब्द की न जब सही जाए
चोट शब्द की न जब सही जाए
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
"गुमनाम जिन्दगी ”
Pushpraj Anant
सुना था,
सुना था,
हिमांशु Kulshrestha
किए जिन्होंने देश हित
किए जिन्होंने देश हित
महेश चन्द्र त्रिपाठी
मेरी प्यारी सासू मां, मैं बहुत खुशनसीब हूं, जो मैंने मां के
मेरी प्यारी सासू मां, मैं बहुत खुशनसीब हूं, जो मैंने मां के
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
विनती
विनती
Kanchan Khanna
ग़ज़ल - ज़िंदगी इक फ़िल्म है -संदीप ठाकुर
ग़ज़ल - ज़िंदगी इक फ़िल्म है -संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
दीपावली त्यौहार
दीपावली त्यौहार
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
ईश्क में यार थोड़ा सब्र करो।
ईश्क में यार थोड़ा सब्र करो।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
सांसों से आईने पर क्या लिखते हो।
सांसों से आईने पर क्या लिखते हो।
Taj Mohammad
"काला झंडा"
*Author प्रणय प्रभात*
मृदा प्रदूषण घातक है जीवन को
मृदा प्रदूषण घातक है जीवन को
Buddha Prakash
2843.*पूर्णिका*
2843.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
प्रकृति की गोद खेल रहे हैं प्राणी
प्रकृति की गोद खेल रहे हैं प्राणी
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
वक्त नहीं
वक्त नहीं
Vandna Thakur
भारी पहाड़ सा बोझ कुछ हल्का हो जाए
भारी पहाड़ सा बोझ कुछ हल्का हो जाए
शेखर सिंह
महाकविः तुलसीदासः अवदत्, यशः, काव्यं, धनं च जीवने एव सार्थकं
महाकविः तुलसीदासः अवदत्, यशः, काव्यं, धनं च जीवने एव सार्थकं
AmanTv Editor In Chief
आँशुओ ने कहा अब इस तरह बहा जाय
आँशुओ ने कहा अब इस तरह बहा जाय
Rituraj shivem verma
Loading...