Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Oct 2023 · 1 min read

#पर्व_का_संदेश-

#कविता-
■ विजया दशमी का संदेश
【प्रणय प्रभात】
“आत्मसात राघव करने थे,
ये सुकृत्य तो करा नहीं।
पुतले बहुत जलाए हमने,
असली रावण मरा नहीं।।
बाहर ढूंढ रहे दशकंधर,
अपने भीतर झांकें हम।
अंदर से उपजा प्रकाश तो,
बाहर नहीं बचेगा तम।।
रावण अपना अहंकार है,
मेघनाद मायावी मन।
अन्तःकरण कुंभकरणी है,
अहिरावण सा छलिया तन।।
बता रही है विजया-दशमी,
निज विकार का शमन करें।
मिल कर रघुराई के पथ पर,
आओ, हम अनुगमन करें।।”
शौर्य-पर्व विजया-दशमी (दशहरे) की अग्रिम बधाई व अशेष-विशेष शुभकामनाओं सहित। जय सियाराम, जय हनुमान।।
■प्रणय प्रभात■
●संपादक/न्यूज़&व्यूज़●
श्योपुर (मध्यप्रदेश)

1 Like · 198 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
नज़रें बयां करती हैं,लेकिन इज़हार नहीं करतीं,
नज़रें बयां करती हैं,लेकिन इज़हार नहीं करतीं,
Keshav kishor Kumar
मसरूफियत बढ़ गई है
मसरूफियत बढ़ गई है
Harminder Kaur
🙅अचरज काहे का...?
🙅अचरज काहे का...?
*Author प्रणय प्रभात*
बड़ी मादक होती है ब्रज की होली
बड़ी मादक होती है ब्रज की होली
कवि रमेशराज
21 उम्र ढ़ल गई
21 उम्र ढ़ल गई
Dr Shweta sood
गौरी।
गौरी।
Acharya Rama Nand Mandal
यूं ही कुछ लिख दिया था।
यूं ही कुछ लिख दिया था।
Taj Mohammad
ये लोकतंत्र की बात है
ये लोकतंत्र की बात है
Rohit yadav
जाने वाले साल को सलाम ,
जाने वाले साल को सलाम ,
Dr. Man Mohan Krishna
2823. *पूर्णिका*
2823. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
‘पितृ देवो भव’ कि स्मृति में दो शब्द.............
‘पितृ देवो भव’ कि स्मृति में दो शब्द.............
Awadhesh Kumar Singh
*परसों बचपन कल यौवन था, आज बुढ़ापा छाया (हिंदी गजल)*
*परसों बचपन कल यौवन था, आज बुढ़ापा छाया (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
अधूरी हसरतें
अधूरी हसरतें
Surinder blackpen
कुंडलिया - गौरैया
कुंडलिया - गौरैया
sushil sarna
यूंही सावन में तुम बुनबुनाती रहो
यूंही सावन में तुम बुनबुनाती रहो
Basant Bhagawan Roy
मेरे उर के छाले।
मेरे उर के छाले।
Anil Mishra Prahari
तुम ही कहती हो न,
तुम ही कहती हो न,
पूर्वार्थ
परो को खोल उड़ने को कहा था तुमसे
परो को खोल उड़ने को कहा था तुमसे
ruby kumari
अपनी-अपनी विवशता
अपनी-अपनी विवशता
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"डर"
Dr. Kishan tandon kranti
जिंदगी उधार की, रास्ते पर आ गई है
जिंदगी उधार की, रास्ते पर आ गई है
Smriti Singh
* ज़ालिम सनम *
* ज़ालिम सनम *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
नरभक्षी_गिद्ध
नरभक्षी_गिद्ध
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
कहमुकरी
कहमुकरी
डॉ.सीमा अग्रवाल
शब्द भावों को सहेजें शारदे माँ ज्ञान दो।
शब्द भावों को सहेजें शारदे माँ ज्ञान दो।
Neelam Sharma
बलिदान
बलिदान
लक्ष्मी सिंह
जीवन
जीवन
Santosh Shrivastava
सफलता
सफलता
Paras Nath Jha
पल पल का अस्तित्व
पल पल का अस्तित्व
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
एक ख़्वाब सी रही
एक ख़्वाब सी रही
Dr fauzia Naseem shad
Loading...