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23 Jul 2023 · 1 min read

ना सातवें आसमान तक

ना सातवें आसमान तक
ना धरा के पार तक
ना कालखंड के अंत तक
ना स्थूल ना-ही सूक्ष्म पल तक
ना सप्त-स्वरों के अंतिम धुन तक
ना श्रृष्टि के विस्तार तक
ना मेघों के बरसात तक
फिर कब तक
‘’ उड़ो आप अंबर पर तब तक
आपका मन करे जब तक ‘’

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