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Nov 12, 2016 · 1 min read

दोहे रमेश के दिवाली पर

संग शारदा मातु के, लक्ष्मी और गणेश !
दीवाली को पूजते, इनको सभी ‘रमेश !!

सर पर है दीपावली, सजे हुवे बाज़ार !
मांगे बच्चो की कई ,मगर जेब लाचार !!

बच्चों की फरमाइशें, लगे टूटने ख्वाब !
फुलझडियों के दाम भी,वाजिब नहीं जनाब !!

दिल जल रहा गरीब का, काँप रहे हैं हाथ !
कैसे दीपक अब जले , बिना तेल के साथ !!

बढ़ती नहीं पगार है, बढ़ जाते है भाव !
दिल के दिल में रह गये , बच्चों के सब चाव!!

कैसे अब अपने जलें, दीवाली के दीप !
काहे की दीपावली , तुम जो नहीं समीप !!

दुनिया में सब से बड़ा, मै ही लगूँ गरीब !
दीवाली पे इस दफा, तुम जो नहीं करीब !!

दीवाली में कौन अब , बाँटेगा उपहार !
तुम जब नहीं समीप तो, काहे का त्यौहार !!

आतिशबाजी का नहीं, करो दिखावा यार !
दीपों का त्यौहार है,….. सबको दें उपहार !

पैसा भी पूरा लगे ,…….. गंदा हो परिवेश !
आतिशबाजी से हुआ,किसका भला “रमेश” !!

आपा बुरी बलाय है, करो न इसका गर्व !
सभी मनाओ साथ में , दीवाली का पर्व !

हाथ हवाओं से सहज ,.. मैंने लिया मिलाय !
सबसे बड़ी मुंडेर पर, दीपक दिया जलाय !!
रमेश शर्मा

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