Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
2 Aug 2023 · 1 min read

दोहा

दोहा
ब्रजमंडल घन श्याम हो, मैं उस ब्रज का मोर।।
पीहू-पीहू बोलकर, मैं नाचूँ चहुँ ओर।
©दुष्यन्त ‘बाबा’

364 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बूथ लेवल अधिकारी(बीएलओ)
बूथ लेवल अधिकारी(बीएलओ)
gurudeenverma198
ऑफिसियल रिलेशन
ऑफिसियल रिलेशन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
विटप बाँटते छाँव है,सूर्य बटोही धूप।
विटप बाँटते छाँव है,सूर्य बटोही धूप।
डॉक्टर रागिनी
संत गाडगे संदेश 5
संत गाडगे संदेश 5
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
आँशुओ ने कहा अब इस तरह बहा जाय
आँशुओ ने कहा अब इस तरह बहा जाय
Rituraj shivem verma
तुम्हे शिकायत है कि जन्नत नहीं मिली
तुम्हे शिकायत है कि जन्नत नहीं मिली
Ajay Mishra
2434.पूर्णिका
2434.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कोई पढ़ ले न चेहरे की शिकन
कोई पढ़ ले न चेहरे की शिकन
Shweta Soni
"मुश्किल वक़्त और दोस्त"
Lohit Tamta
मुझे इस दुनिया ने सिखाया अदाबत करना।
मुझे इस दुनिया ने सिखाया अदाबत करना।
Phool gufran
*मजा हार में आता (बाल कविता)*
*मजा हार में आता (बाल कविता)*
Ravi Prakash
आजकल के बच्चे घर के अंदर इमोशनली बहुत अकेले होते हैं। माता-प
आजकल के बच्चे घर के अंदर इमोशनली बहुत अकेले होते हैं। माता-प
पूर्वार्थ
चोट
चोट
आकांक्षा राय
कविता
कविता
Rambali Mishra
"छोटी चीजें"
Dr. Kishan tandon kranti
मुझ को इतना बता दे,
मुझ को इतना बता दे,
Shutisha Rajput
*कांच से अल्फाज़* पर समीक्षा *श्रीधर* जी द्वारा समीक्षा
*कांच से अल्फाज़* पर समीक्षा *श्रीधर* जी द्वारा समीक्षा
Surinder blackpen
जीवन जितना होता है
जीवन जितना होता है
Dr fauzia Naseem shad
🥀*✍अज्ञानी की*🥀
🥀*✍अज्ञानी की*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
When you realize that you are the only one who can lift your
When you realize that you are the only one who can lift your
Manisha Manjari
अभी गहन है रात.......
अभी गहन है रात.......
Parvat Singh Rajput
रंग भरी पिचकारियाँ,
रंग भरी पिचकारियाँ,
sushil sarna
गीतिका-
गीतिका-
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
जीवन देने के दांत / MUSAFIR BAITHA
जीवन देने के दांत / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
जग कल्याणी
जग कल्याणी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
वोट दिया किसी और को,
वोट दिया किसी और को,
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
■ उसकी रज़ा, अपना मज़ा।।
■ उसकी रज़ा, अपना मज़ा।।
*Author प्रणय प्रभात*
प्रेम और सद्भाव के रंग सारी दुनिया पर डालिए
प्रेम और सद्भाव के रंग सारी दुनिया पर डालिए
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
वर्तमान के युवा शिक्षा में उतनी रुचि नहीं ले रहे जितनी वो री
वर्तमान के युवा शिक्षा में उतनी रुचि नहीं ले रहे जितनी वो री
Rj Anand Prajapati
दूर जाकर क्यों बना लीं दूरियां।
दूर जाकर क्यों बना लीं दूरियां।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...