Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Dec 2023 · 1 min read

देख लेते

देख लेते हम अपनी आंखों से ।
ज़िन्दगी ख़्वाब तो नहीं होती ।।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: शेर
5 Likes · 133 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
हमने तुमको दिल दिया...
हमने तुमको दिल दिया...
डॉ.सीमा अग्रवाल
* माथा खराब है *
* माथा खराब है *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मेरी जिंदगी सजा दे
मेरी जिंदगी सजा दे
Basant Bhagawan Roy
बीड़ी की बास
बीड़ी की बास
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
ग़ज़ल/नज़्म - इश्क के रणक्षेत्र में बस उतरे वो ही वीर
ग़ज़ल/नज़्म - इश्क के रणक्षेत्र में बस उतरे वो ही वीर
अनिल कुमार
कविता: सपना
कविता: सपना
Rajesh Kumar Arjun
🧟☠️अमावस की रात☠️🧟
🧟☠️अमावस की रात☠️🧟
SPK Sachin Lodhi
2464.पूर्णिका
2464.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
शहर में बिखरी है सनसनी सी ,
शहर में बिखरी है सनसनी सी ,
Manju sagar
सद्विचार
सद्विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
है तो है
है तो है
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
नव वर्ष
नव वर्ष
Satish Srijan
#शेर-
#शेर-
*Author प्रणय प्रभात*
आदिम परंपराएं
आदिम परंपराएं
Shekhar Chandra Mitra
जो लिखा है
जो लिखा है
Dr fauzia Naseem shad
"गुलजार"
Dr. Kishan tandon kranti
सम्राट कृष्णदेव राय
सम्राट कृष्णदेव राय
Ajay Shekhavat
💐प्रेम कौतुक-434💐
💐प्रेम कौतुक-434💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
कोशिश कम न थी मुझे गिराने की,
कोशिश कम न थी मुझे गिराने की,
Vindhya Prakash Mishra
शक्तिहीनों का कोई संगठन नहीं होता।
शक्तिहीनों का कोई संगठन नहीं होता।
Sanjay ' शून्य'
आ ठहर विश्राम कर ले।
आ ठहर विश्राम कर ले।
सरोज यादव
अगनित अभिलाषा
अगनित अभिलाषा
Dr. Meenakshi Sharma
छोटी कहानी -
छोटी कहानी - "पानी और आसमान"
Dr Tabassum Jahan
अब कहां वो प्यार की रानाइयां।
अब कहां वो प्यार की रानाइयां।
सत्य कुमार प्रेमी
कान्हा घनाक्षरी
कान्हा घनाक्षरी
Suryakant Dwivedi
प्लास्टिक बंदी
प्लास्टिक बंदी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
दिखा तू अपना जलवा
दिखा तू अपना जलवा
gurudeenverma198
February 14th – a Black Day etched in our collective memory,
February 14th – a Black Day etched in our collective memory,
पूर्वार्थ
*पहिए हैं हम दो प्रिये ,चलते अपनी चाल (कुंडलिया)*
*पहिए हैं हम दो प्रिये ,चलते अपनी चाल (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
मोबाईल नहीं
मोबाईल नहीं
Harish Chandra Pande
Loading...