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24 Feb 2023 · 1 min read

देकर हुनर कलम का,

देकर हुनर कलम का,
तरन्नुम नहीं बख्शा।
लिखता तो नज्में अक्सर,
किसी बज़्म में नहीं गाता।

सतीश सृजन

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