Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Sep 2022 · 1 min read

दूर निकल आया हूँ खुद से

गीत…

दूर निकल आया हूँ खुद से,
अब वापस है जाना मुश्किल।
सम्बन्धों का वह अपनापन,
ज्ञात हमें है पाना मुश्किल।।

जान गया हूँ प्यार हृदय का,
कैसे पत्थर हो जाता है।
कैसे मिलता था जो अर्पण,
अब मिलने से कतराता है।।
जब चुभने लग जाये दर्पण,
होता रूप बसाना मुश्किल।।
दूर निकल आया हूँ खुद से,
अब वापस है जाना मुश्किल।

शंकाओं से लड़ते- लड़ते,
खुद में इतना टूट गया हूँ।
लगता है ज्यों बीच भँवर में,
आज अकेला छूट गया हूँ।।
सुनकर जो आ जाते थे झट,
उनको पास बुलाना मुश्किल।
दूर निकल आया हूँ खुद से,
अब वापस है जाना मुश्किल।।

वो क्या समझेंगे ना समझे,
जो भावों की डोर सुकोमल।
कर पाया इससे ना मन की,
दुविधाओं का मैं कोई हल।।
भाप नहीं पाये जो उलझन,
उनको दर्द दिखाना मुश्किल।
दूर निकल आया हूँ खुद से,
अब वापस है जाना मुश्किल।।

जीना तो है ही दुनियां में,
दिखलाने को हँसना भी है।
एक बहाना उम्मीदों का,
इन आँखों में बसना भी है।
लेकिन अपनेपन में खोकर,
कोई गीत सुनाना मुश्किल।
दूर निकल आया हूँ खुद से,
अब वापस है जाना मुश्किल।।

दूर निकल आया हूँ खुद से,
अब वापस है जाना मुश्किल।
सम्बन्धों का वह अपनापन,
ज्ञात हमें है पाना मुश्किल।।

डाॅ. राजेन्द्र सिंह ‘राही’
(बस्ती उ. प्र.)

Language: Hindi
Tag: गीत
1 Like · 220 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जीवन
जीवन
Santosh Shrivastava
सद्विचार
सद्विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
आम का मौसम
आम का मौसम
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
!! युवा !!
!! युवा !!
Akash Yadav
मेरी जिंदगी सजा दे
मेरी जिंदगी सजा दे
Basant Bhagawan Roy
आजकल गजब का खेल चल रहा है
आजकल गजब का खेल चल रहा है
Harminder Kaur
2624.पूर्णिका
2624.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
আজকের মানুষ
আজকের মানুষ
Ahtesham Ahmad
*आदत*
*आदत*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"इमली"
Dr. Kishan tandon kranti
● रूम-पार्टनर
● रूम-पार्टनर
*Author प्रणय प्रभात*
कवित्त छंद ( परशुराम जयंती )
कवित्त छंद ( परशुराम जयंती )
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Jitendra Kumar Noor
खंडकाव्य
खंडकाव्य
Suryakant Dwivedi
खुश वही है जिंदगी में जिसे सही जीवन साथी मिला है क्योंकि हर
खुश वही है जिंदगी में जिसे सही जीवन साथी मिला है क्योंकि हर
Ranjeet kumar patre
मुस्कानों की बागानों में
मुस्कानों की बागानों में
sushil sarna
जिधर भी देखो , हर तरफ़ झमेले ही झमेले है,
जिधर भी देखो , हर तरफ़ झमेले ही झमेले है,
_सुलेखा.
नफरत दिलों की मिटाने, आती है यह होली
नफरत दिलों की मिटाने, आती है यह होली
gurudeenverma198
पराया हुआ मायका
पराया हुआ मायका
विक्रम कुमार
सफर की महोब्बत
सफर की महोब्बत
Anil chobisa
जीवन की नैया
जीवन की नैया
भरत कुमार सोलंकी
Lines of day
Lines of day
Sampada
जिंदगी में सिर्फ हम ,
जिंदगी में सिर्फ हम ,
Neeraj Agarwal
हम समुंदर का है तेज, वह झरनों का निर्मल स्वर है
हम समुंदर का है तेज, वह झरनों का निर्मल स्वर है
Shubham Pandey (S P)
बेटियां बोझ नहीं होती
बेटियां बोझ नहीं होती
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
*सीधे-सादे चलिए साहिब (हिंदी गजल)*
*सीधे-सादे चलिए साहिब (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
दिलरुबा जे रहे
दिलरुबा जे रहे
Shekhar Chandra Mitra
माँ महान है
माँ महान है
Dr. Man Mohan Krishna
सुदामा जी
सुदामा जी
Vijay Nagar
*मनुष्य जब मरता है तब उसका कमाया हुआ धन घर में ही रह जाता है
*मनुष्य जब मरता है तब उसका कमाया हुआ धन घर में ही रह जाता है
Shashi kala vyas
Loading...