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9 Jul 2023 · 1 min read

दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।

दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
साँकल की आवाज को, तरस रहे हैं कान ।।

✍️ अरविन्द “महम्मदाबादी”

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