Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Mar 2024 · 1 min read

*दिल चाहता है*

लेखक डॉ अरूण कुमार शास्त्री
विषय तेरी मेरी कहानी
भाषा हिंदी
विधा स्वच्छंद कविता
शीर्षक दिल चाहता है

तेरी मेरी कहानी हो गई यूं तो बहुत पुरानी ।
लेकिन जब तक सूरज चांद रहेगें
दोहरायेंगे नाना नानी ।

प्यार तो मरता नहीं ये जिंदगी के साथ है।
दिल धड़कता ही रहेगा जब तक भावनाएं और एहसास है ।

तुम न रहोगे हम न रहेगें फिर भी कहानियां तो रहेंगी।
प्यार करने वालों के इजलास में समर्पित रवानियां तो रहेंगी ।

तेरी मेरी कहानी हो गई यूं तो बहुत पुरानी ।
लेकिन जब तक सूरज चांद रहेगें
दोहरायेंगे नाना नानी ।

छू कर तेरी जुल्फों को जब भी चलेगी ये बयार , खुशबुएं बतलाएंगी मैं ही हूं तेरा प्यार।

आदम हब्बा, लैला मजनू, हीर रांझा कौन हैं भूल भी जायेंगे मगर।
तेरी मेरी कहानी दोहराएंगे सभी अपने अपने प्यार के संग संग हर डगर ।

तेरी मेरी कहानी हो गई यूं तो बहुत पुरानी ।
लेकिन जब तक सूरज चांद रहेगें
दोहरायेंगे नाना नानी ।

85 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from DR ARUN KUMAR SHASTRI
View all
You may also like:
सत्य कर्म की सीढ़ी चढ़कर,बिना किसी को कष्ट दिए जो सफलता प्रा
सत्य कर्म की सीढ़ी चढ़कर,बिना किसी को कष्ट दिए जो सफलता प्रा
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
#ग़ज़ल-
#ग़ज़ल-
*प्रणय प्रभात*
स्वाभिमान
स्वाभिमान
Shyam Sundar Subramanian
Environment
Environment
Neelam Sharma
बीतल बरस।
बीतल बरस।
Acharya Rama Nand Mandal
"सैनिक की चिट्ठी"
Ekta chitrangini
न ही मगरूर हूं, न ही मजबूर हूं।
न ही मगरूर हूं, न ही मजबूर हूं।
विकास शुक्ल
जो होता है सही  होता  है
जो होता है सही होता है
Anil Mishra Prahari
*हे तात*
*हे तात*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गुरु के पद पंकज की पनही
गुरु के पद पंकज की पनही
Sushil Pandey
याद आते हैं
याद आते हैं
Juhi Grover
संतुलित रखो जगदीश
संतुलित रखो जगदीश
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
*पद के पीछे लोग 【कुंडलिया】*
*पद के पीछे लोग 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
कुछ याद बन
कुछ याद बन
Dr fauzia Naseem shad
मन ,मौसम, मंजर,ये तीनों
मन ,मौसम, मंजर,ये तीनों
Shweta Soni
गांव की ख्वाइश है शहर हो जानें की और जो गांव हो चुके हैं शहर
गांव की ख्वाइश है शहर हो जानें की और जो गांव हो चुके हैं शहर
Soniya Goswami
सब दिन होते नहीं समान
सब दिन होते नहीं समान
जगदीश लववंशी
मन का मिलन है रंगों का मेल
मन का मिलन है रंगों का मेल
Ranjeet kumar patre
रमेशराज की ‘ गोदान ‘ के पात्रों विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की ‘ गोदान ‘ के पात्रों विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
My Chic Abuela🤍
My Chic Abuela🤍
Natasha Stephen
" टैगोर "
सुनीलानंद महंत
"प्रवास"
Dr. Kishan tandon kranti
*📌 पिन सारे कागज़ को*
*📌 पिन सारे कागज़ को*
Santosh Shrivastava
बस्ती जलते हाथ में खंजर देखा है,
बस्ती जलते हाथ में खंजर देखा है,
ज़ैद बलियावी
प्यार दर्पण के जैसे सजाना सनम,
प्यार दर्पण के जैसे सजाना सनम,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
Wait ( Intezaar)a precious moment of life:
Wait ( Intezaar)a precious moment of life:
पूर्वार्थ
"वादा" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
2936.*पूर्णिका*
2936.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
"गुमनाम जिन्दगी ”
Pushpraj Anant
एक आंसू
एक आंसू
Surinder blackpen
Loading...