Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Feb 2024 · 1 min read

जो लोग धन को ही जीवन का उद्देश्य समझ बैठे है उनके जीवन का भो

जो लोग धन को ही जीवन का उद्देश्य समझ बैठे है उनके जीवन का भोग विलासिता के आलवा कोई उद्देश्य नहीं है।
RJ Anand Prajapati

67 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मैं कहना भी चाहूं उनसे तो कह नहीं सकता
मैं कहना भी चाहूं उनसे तो कह नहीं सकता
Mr.Aksharjeet
त्याग
त्याग
AMRESH KUMAR VERMA
संभव कब है देखना ,
संभव कब है देखना ,
sushil sarna
*** बिंदु और परिधि....!!! ***
*** बिंदु और परिधि....!!! ***
VEDANTA PATEL
सन् २०२३ में,जो घटनाएं पहली बार हुईं
सन् २०२३ में,जो घटनाएं पहली बार हुईं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अजीब सी बेताबी है
अजीब सी बेताबी है
शेखर सिंह
बड़े इत्मीनान से सो रहे हो,
बड़े इत्मीनान से सो रहे हो,
Buddha Prakash
मेरे दिल के खूं से, तुमने मांग सजाई है
मेरे दिल के खूं से, तुमने मांग सजाई है
gurudeenverma198
जो आपका गुस्सा सहन करके भी आपका ही साथ दें,
जो आपका गुस्सा सहन करके भी आपका ही साथ दें,
Ranjeet kumar patre
शतरंज की बिसात सी बनी है ज़िन्दगी,
शतरंज की बिसात सी बनी है ज़िन्दगी,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
* तपन *
* तपन *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
कड़वी बात~
कड़वी बात~
दिनेश एल० "जैहिंद"
*विश्व योग दिवस : 21 जून (मुक्तक)*
*विश्व योग दिवस : 21 जून (मुक्तक)*
Ravi Prakash
बहता पानी
बहता पानी
साहिल
कुछ फूल तो कुछ शूल पाते हैँ
कुछ फूल तो कुछ शूल पाते हैँ
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
शारदीय नवरात्र
शारदीय नवरात्र
Neeraj Agarwal
"ज्यादा मिठास शक के घेरे में आती है
Priya princess panwar
उद् 🌷गार इक प्यार का
उद् 🌷गार इक प्यार का
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
💜सपना हावय मोरो💜
💜सपना हावय मोरो💜
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
जो बीत गयी सो बीत गई जीवन मे एक सितारा था
जो बीत गयी सो बीत गई जीवन मे एक सितारा था
Rituraj shivem verma
वतन की राह में, मिटने की हसरत पाले बैठा हूँ
वतन की राह में, मिटने की हसरत पाले बैठा हूँ
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ग़ज़ल/नज़्म - दस्तूर-ए-दुनिया तो अब ये आम हो गया
ग़ज़ल/नज़्म - दस्तूर-ए-दुनिया तो अब ये आम हो गया
अनिल कुमार
आखिरी अल्फाजों में कहा था उसने बहुत मिलेंगें तेरे जैसे
आखिरी अल्फाजों में कहा था उसने बहुत मिलेंगें तेरे जैसे
शिव प्रताप लोधी
बुढ़ादेव तुम्हें नमो-नमो
बुढ़ादेव तुम्हें नमो-नमो
नेताम आर सी
"एकान्त"
Dr. Kishan tandon kranti
अजनबी
अजनबी
Shyam Sundar Subramanian
चूड़ियां
चूड़ियां
Madhavi Srivastava
भेड़ चालों का रटन हुआ
भेड़ चालों का रटन हुआ
Vishnu Prasad 'panchotiya'
तू मिला जो मुझे इक हंसी मिल गई
तू मिला जो मुझे इक हंसी मिल गई
कृष्णकांत गुर्जर
3380⚘ *पूर्णिका* ⚘
3380⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
Loading...