Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Jan 2024 · 1 min read

जो राम हमारे कण कण में थे उन पर बड़ा सवाल किया।

जो राम हमारे कण कण में थे उन पर बड़ा सवाल किया।
जो रामभक्त थे उनका सदियों से जीना बेहाल किया।।
जिसकी भृकुटी के हिलने से ही सृष्टि प्रलय हो जाती है।
अस्तित्व काल्पनिक था उनका ये कहकर बहुत बवाल किया।
आसुरी प्रवृति थी रामभक्त संतों पर गोली चलवाई।
सोया भारत फिर जाग रहा ले रहा सनातन अंगड़ाई।।
🌹जय श्री राम🌹

1 Like · 177 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
22-दुनिया
22-दुनिया
Ajay Kumar Vimal
किसी भी चीज़ की आशा में गवाँ मत आज को देना
किसी भी चीज़ की आशा में गवाँ मत आज को देना
आर.एस. 'प्रीतम'
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
संघर्ष....... जीवन
संघर्ष....... जीवन
Neeraj Agarwal
ज़िंदगी तेरी किताब में
ज़िंदगी तेरी किताब में
Dr fauzia Naseem shad
सजा दे ना आंगन फूल से रे माली
सजा दे ना आंगन फूल से रे माली
Basant Bhagawan Roy
फितरत अमिट जन एक गहना
फितरत अमिट जन एक गहना
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
ख्वाबों में मिलना
ख्वाबों में मिलना
Surinder blackpen
*Loving Beyond Religion*
*Loving Beyond Religion*
Poonam Matia
💫समय की वेदना💫
💫समय की वेदना💫
SPK Sachin Lodhi
शार्टकट
शार्टकट
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"ख्वाहिशें"
Dr. Kishan tandon kranti
"The Power of Orange"
Manisha Manjari
अनमोल आँसू
अनमोल आँसू
Awadhesh Singh
स्वयं में एक संस्था थे श्री ओमकार शरण ओम
स्वयं में एक संस्था थे श्री ओमकार शरण ओम
Ravi Prakash
जन्म से मरन तक का सफर
जन्म से मरन तक का सफर
Vandna Thakur
आँख
आँख
विजय कुमार अग्रवाल
हौसला अगर बुलंद हो
हौसला अगर बुलंद हो
Paras Nath Jha
जैसे ये घर महकाया है वैसे वो आँगन महकाना
जैसे ये घर महकाया है वैसे वो आँगन महकाना
Dr Archana Gupta
जीवन में अहम और वहम इंसान की सफलता को चुनौतीपूर्ण बना देता ह
जीवन में अहम और वहम इंसान की सफलता को चुनौतीपूर्ण बना देता ह
लोकेश शर्मा 'अवस्थी'
भगवान सर्वव्यापी हैं ।
भगवान सर्वव्यापी हैं ।
ओनिका सेतिया 'अनु '
अन्तर्मन की विषम वेदना
अन्तर्मन की विषम वेदना
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
.......,,
.......,,
शेखर सिंह
2928.*पूर्णिका*
2928.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
उलझते रिश्तो में मत उलझिये
उलझते रिश्तो में मत उलझिये
Harminder Kaur
धर्म की खूंटी
धर्म की खूंटी
मनोज कर्ण
बुंदेली दोहा -खिलकट (आधे पागल)
बुंदेली दोहा -खिलकट (आधे पागल)
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
प्रेरणा और पराक्रम
प्रेरणा और पराक्रम
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
#लघुकविता-
#लघुकविता-
*प्रणय प्रभात*
बात खो गई
बात खो गई
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
Loading...