Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
2 Oct 2023 · 1 min read

” जिन्दगी क्या है “

” जिन्दगी क्या है ”

जिन्दगी क्या है, यह सवाल है सबका दिल बेहद प्यारा,
एक कविता के माध्यम से समझाऊं, क्योंकि जवाब है यह कठिन, भिन्न-भिन्न धारा।

जिन्दगी एक फ़सल है, बोया हर किसी ने अपने सपनों से,
समय के साथ बदलती है, बिना किसी सेहमति के।

कभी हंसते हैं, कभी रोते हैं, कभी मुसीबतों में परेशान,
पर जिन्दगी का सफर हमें सिखाता है मजबूत होने का ज्ञान।।

10 Likes · 3 Comments · 227 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
गरिमामय प्रतिफल
गरिमामय प्रतिफल
Shyam Sundar Subramanian
कुछ लोग रिश्ते में व्यवसायी होते हैं,
कुछ लोग रिश्ते में व्यवसायी होते हैं,
Vindhya Prakash Mishra
भिखारी का बैंक
भिखारी का बैंक
Punam Pande
अगर मध्यस्थता हनुमान (परमार्थी) की हो तो बंदर (बाली)और दनुज
अगर मध्यस्थता हनुमान (परमार्थी) की हो तो बंदर (बाली)और दनुज
Sanjay ' शून्य'
ना कुछ जवाब देती हो,
ना कुछ जवाब देती हो,
Dr. Man Mohan Krishna
"समय के साथ"
Dr. Kishan tandon kranti
मुक्तक
मुक्तक
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
ज़माने   को   समझ   बैठा,  बड़ा   ही  खूबसूरत है,
ज़माने को समझ बैठा, बड़ा ही खूबसूरत है,
संजीव शुक्ल 'सचिन'
विषय मेरा आदर्श शिक्षक
विषय मेरा आदर्श शिक्षक
कार्तिक नितिन शर्मा
दिल रंज का शिकार है और किस क़दर है आज
दिल रंज का शिकार है और किस क़दर है आज
Sarfaraz Ahmed Aasee
जीवन के दिन चार थे, तीन हुआ बेकार।
जीवन के दिन चार थे, तीन हुआ बेकार।
Manoj Mahato
रमेशराज की कविता विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की कविता विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
■ छठ महापर्व...।।
■ छठ महापर्व...।।
*Author प्रणय प्रभात*
ड्रीम-टीम व जुआ-सटा
ड्रीम-टीम व जुआ-सटा
Anil chobisa
लम्हें हसीन हो जाए जिनसे
लम्हें हसीन हो जाए जिनसे
शिव प्रताप लोधी
मत कर ग़ुरूर अपने क़द पर
मत कर ग़ुरूर अपने क़द पर
Trishika S Dhara
,,
,,
Sonit Parjapati
सेर
सेर
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
ज़रूरतमंद की मदद
ज़रूरतमंद की मदद
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
2662.*पूर्णिका*
2662.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सौन्दर्य के मक़बूल, इश्क़! तुम क्या जानो प्रिय ?
सौन्दर्य के मक़बूल, इश्क़! तुम क्या जानो प्रिय ?
Varun Singh Gautam
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
प्रेम की अनिवार्यता
प्रेम की अनिवार्यता
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
सांत्वना
सांत्वना
भरत कुमार सोलंकी
हम संभलते है, भटकते नहीं
हम संभलते है, भटकते नहीं
Ruchi Dubey
वतन के तराने
वतन के तराने
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
ए जिंदगी ,,
ए जिंदगी ,,
श्याम सिंह बिष्ट
राम जैसा मनोभाव
राम जैसा मनोभाव
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
जीवन दुखों से भरा है जीवन के सभी पक्षों में दुख के बीज सम्मि
जीवन दुखों से भरा है जीवन के सभी पक्षों में दुख के बीज सम्मि
Ms.Ankit Halke jha
"परिवार एक सुखद यात्रा"
Ekta chitrangini
Loading...