Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Sep 2023 · 1 min read

जमाने की नजरों में ही रंजीश-ए-हालात है,

जमाने की नजरों में ही रंजीश-ए-हालात है,
पता नहीं क्यों अक्सर समझ नहीं पाते।

2 Likes · 128 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
Agar padhne wala kabil ho ,
Agar padhne wala kabil ho ,
Sakshi Tripathi
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी
वह सिर्फ पिता होता है
वह सिर्फ पिता होता है
Dinesh Gupta
मेनका की ‘मी टू’
मेनका की ‘मी टू’
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*रामचरितमानस अति प्यारा (चौपाइयॉं)*
*रामचरितमानस अति प्यारा (चौपाइयॉं)*
Ravi Prakash
सफलता का सोपान
सफलता का सोपान
Sandeep Pande
लेशमात्र भी शर्म का,
लेशमात्र भी शर्म का,
sushil sarna
खुदा रखे हमें चश्मे-बद से सदा दूर...
खुदा रखे हमें चश्मे-बद से सदा दूर...
shabina. Naaz
दोहा-*
दोहा-*
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
मुक्तक
मुक्तक
जगदीश शर्मा सहज
मैं अपनी खूबसूरत दुनिया में
मैं अपनी खूबसूरत दुनिया में
ruby kumari
महिला दिवस कुछ व्यंग्य-कुछ बिंब
महिला दिवस कुछ व्यंग्य-कुछ बिंब
Suryakant Dwivedi
रुसवा हुए हम सदा उसकी गलियों में,
रुसवा हुए हम सदा उसकी गलियों में,
Vaishaligoel
आईना ही बता पाए
आईना ही बता पाए
goutam shaw
हमारा प्रेम
हमारा प्रेम
अंजनीत निज्जर
#हिंदी_मुक्तक-
#हिंदी_मुक्तक-
*Author प्रणय प्रभात*
आईना
आईना
Sûrëkhâ Rãthí
2787. *पूर्णिका*
2787. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कहानी
कहानी
कवि रमेशराज
बेटी परायो धन बताये, पिहर सु ससुराल मे पति थम्माये।
बेटी परायो धन बताये, पिहर सु ससुराल मे पति थम्माये।
Anil chobisa
........,!
........,!
शेखर सिंह
तोड़ न कोई राम का, निर्विकल्प हैं राम।
तोड़ न कोई राम का, निर्विकल्प हैं राम।
डॉ.सीमा अग्रवाल
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
मैं तो महज प्रेमिका हूँ
मैं तो महज प्रेमिका हूँ
VINOD CHAUHAN
काश कभी ऐसा हो पाता
काश कभी ऐसा हो पाता
Rajeev Dutta
वेलेंटाइन डे आशिकों का नवरात्र है उनको सारे डे रोज, प्रपोज,च
वेलेंटाइन डे आशिकों का नवरात्र है उनको सारे डे रोज, प्रपोज,च
Rj Anand Prajapati
उम्मीदों के आसमान पे बैठे हुए थे जब,
उम्मीदों के आसमान पे बैठे हुए थे जब,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
श्रीराम
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
"लेखनी"
Dr. Kishan tandon kranti
9-अधम वह आदमी की शक्ल में शैतान होता है
9-अधम वह आदमी की शक्ल में शैतान होता है
Ajay Kumar Vimal
Loading...