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27 Mar 2024 · 1 min read

घर घर रंग बरसे

होली गीत

अवध मे आये रघुनाथ, घर- घर रंग बरसे।
होली खेलें सिया साथ, घर-घर रंग बरसे।।
चहुँ दिश ॠतु बसंत है छाई।
धरती अंबर मन हरषाई।
मंद मंद बह रही समीरा।
खेल रहे सब रंग अबीरा।
सिया संग खेले रघुनाथ, घर-घर रंग बरसे।
अवध में आए रघुनाथ, घर-घर रंग बरसे।।

बरष पाँच सौ कीन्ह प्रतीक्षा।
न्यायालय मे दीन्ह परीक्षा ।
तब रंजन शुभ घड़ी ये आई।
घर-घर दिवाली है मनाई ।
जब बोले विहँसि रघुनाथ, घर-घर रंग बरसे।
अवध मे आये रघुनाथ, घर-घर रंग बरसे।

पवनपुत्र रंग लेकर आये।
लखनलाल बहुतै हरषाये।
कपि मतवाला खेल निराला।
धन्य अवध के भाग्य विशाला।
गले मिले है दीनानाथ, घर-घर रंग बरसे।
अवध मे आये रघुनाथ, घर-घर रंग बरसे।
स्वरचित:
राजेश तिवारी”रंजन”
बाँदा उत्तर प्रदेश
मो0 9125604777

Language: Hindi
40 Views
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