Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Feb 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

आप मुरझाए हैं, क्यों सूखे गुलाबों की तरह।
किस लिए गुस्सा उतर आया अजाबों की तरह।
🌹
पाए तकमील नहीं पहुंचा मुहब्बत मेरा।
इसलिए मैं हूं अधूरा मेरे ख्वाबों की तरह।
🌹
मैंने तो दिल में छुपा रखा है उसको अपने।
उसकी चाहत है मगर वह है हिजाबों की तरह।
🌹
तिश्नगी में चले आए थे लबे दरिया पर।
वह नजर आता है सहरा में सराबों की तरह।
🌹
इतना आसान नहीं है मेरे जख्मों का हिसाब।
खत्म होता नही है सूदी हिसाबों की तरह।
🌹
खत मेरे जब भी पढ़ोगे तुम्हे तड़पाएंगी।
मेरी यादें हैं मगर बंद किताबों की तरह।
🌹
दास्तां इश्क की पढ़ते हैं सभी शाम ओ सहर।
इतना आसान नहीं पढ़ना निसाबों की तरह।
🌹
मैं “सगीर” उसके सवालों में उलझ जाता हूं।
यार दिलचस्प हो तुम अपने जवाबों की तरह।
_________❤️❤️❤️❤️❤️
शब्दार्थ
अज़ाब= ईश्वरीय प्रकोप
तिश्नगी= प्यास
सहरा= जंगल
हिजाब =नकाब, छुपाना
पाए तकमील= पूर्णता
सराबों= रेतीले स्थान पर धूप से नजरों का धोखा होना,मृगतृष्णा
निसाबों= पाठ्यक्रम

Language: Hindi
1 Like · 56 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सितारे  आजकल  हमारे
सितारे आजकल हमारे
shabina. Naaz
नींदों में जिसको
नींदों में जिसको
Dr fauzia Naseem shad
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
सौगंध से अंजाम तक - दीपक नीलपदम्
सौगंध से अंजाम तक - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
नर नारी संवाद
नर नारी संवाद
DR ARUN KUMAR SHASTRI
किसने तेरा साथ दिया है
किसने तेरा साथ दिया है
gurudeenverma198
आज की नारी
आज की नारी
Shriyansh Gupta
*शिवाजी का आह्वान*
*शिवाजी का आह्वान*
कवि अनिल कुमार पँचोली
नया से भी नया
नया से भी नया
Ramswaroop Dinkar
चैन से जिंदगी
चैन से जिंदगी
Basant Bhagawan Roy
मित्रो नमस्कार!
मित्रो नमस्कार!
अटल मुरादाबादी, ओज व व्यंग कवि
गीत
गीत
Shiva Awasthi
ग़म बांटने गए थे उनसे दिल के,
ग़म बांटने गए थे उनसे दिल के,
ओसमणी साहू 'ओश'
!! नववर्ष नैवेद्यम !!
!! नववर्ष नैवेद्यम !!
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
जीवात्मा
जीवात्मा
Mahendra singh kiroula
हिन्दू और तुर्क दोनों को, सीधे शब्दों में चेताया
हिन्दू और तुर्क दोनों को, सीधे शब्दों में चेताया
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Don't bask in your success
Don't bask in your success
सिद्धार्थ गोरखपुरी
■ फूट गए मुंह सारों के। किनारा कर रहे हैं नपुंसक। निंदा का स
■ फूट गए मुंह सारों के। किनारा कर रहे हैं नपुंसक। निंदा का स
*Author प्रणय प्रभात*
पुण्य स्मरण: 18 जून2008 को मुरादाबाद में आयोजित पारिवारिक सम
पुण्य स्मरण: 18 जून2008 को मुरादाबाद में आयोजित पारिवारिक सम
Ravi Prakash
कहां गए तुम
कहां गए तुम
Satish Srijan
मोनू बंदर का बदला
मोनू बंदर का बदला
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
रात के अंधेरों से सीखा हूं मैं ।
रात के अंधेरों से सीखा हूं मैं ।
★ IPS KAMAL THAKUR ★
सरस्वती वंदना-1
सरस्वती वंदना-1
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
बुरा ख्वाबों में भी जिसके लिए सोचा नहीं हमने
बुरा ख्वाबों में भी जिसके लिए सोचा नहीं हमने
Shweta Soni
बिछड़ कर तू भी जिंदा है
बिछड़ कर तू भी जिंदा है
डॉ. दीपक मेवाती
सच तो रोशनी का आना हैं
सच तो रोशनी का आना हैं
Neeraj Agarwal
बनारस के घाटों पर रंग है चढ़ा,
बनारस के घाटों पर रंग है चढ़ा,
Sahil Ahmad
"बेहतर है चुप रहें"
Dr. Kishan tandon kranti
मुक्तामणि छंद [सम मात्रिक].
मुक्तामणि छंद [सम मात्रिक].
Subhash Singhai
दोहा-
दोहा-
दुष्यन्त बाबा
Loading...