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16 Jan 2024 · 1 min read

ग़ज़ल

बात निकली है खिड़कियों से कहीं
खुला पर्दा है आँधियों से कहीं

रोशनी छिप गयी है बादल में
चाँद को देख कनखियों से कहीं

वो ख़फा होके हँस रहा होगा
प्यार की मीठी झिड़कियों से कहीं

गुल को गुलदस्ते में सजा रखना
मिल ही जायेगा तितलियों से कहीं

है ‘महज’ इत्मिनान अब हमको
राज़ निकलेगा ख़ामियों से कहीं

Language: Hindi
1 Like · 86 Views
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