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10 Apr 2023 · 1 min read

ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेशक़ दुनियादारी रख
लेकिन सीरत प्यारी रख

दुनिया कब जीने देगी
थोड़ी सी मक्कारी रख

जाने कब काम आ जाएं
चोरों से भी यारी रख

भूखा ना लौटे दर से
दिल में वो दिलदारी रख

जाने कब आए सम्मन
जाने की तैयारी रख

खाक़ वतन की चंदन है
इससे मत गद्दारी रख

आने न सके नफ़रत प्रीतम
दिल में चार दिवारी रख

प्रीतम श्रावस्तवी

Language: Hindi
2 Likes · 210 Views
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