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6 Feb 2023 · 1 min read

ग़ज़ल

काँच गिरे ज्यूँ हाथों से यूँ खोया है कुछ लोगों को
भूले से इक नग़्मे सा भी गाया है कुछ लोगों को

गैरों के शानों पे झुकते लोग बहुत मिल जाते हैं
हमने अपनों से शरमाते देखा है कुछ लोगों को

खुदगर्ज़ी का आँचल ओढ़े दिखता है जब इश्क़ यहाँ
दिल ने ऐसे मौकों पर फिर सोचा है कुछ लोगों को

जो सबसे है पार सदा ही, मोह भले ही माया हो
उसने भी इस जग में आकर चाहा है कुछ लोगों को

इस दुनिया में जी लेने को कुछ लोगों को याद रखा
और फिर जीने की ख़ातिर ही भूला है कुछ लोगों को

यूँ तो हर शय इस दुनिया की बेमानी सी लगती है
हाँ पर हैरानी से अक़्सर देखा है कुछ लोगों को

कोई इंसां इस दुनिया में बिन कारण कब मिलता है
भाग्य कभी हतभाग्य हमारा लाया है कुछ लोगों को

सुरेखा कादियान ‘सृजना’

Language: Hindi
1 Like · 146 Views
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