Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Jul 2023 · 1 min read

खेल सारा वक्त का है _

खेल सारा वक्त का है _
जिनके साथ रहकर सपने सजाए
“वक्त “ने_
उन्ही के साथ रहने नही दिया।
गलती हमारी थी _
या
#वक्त #को यही मंजूर था।
कवि राजेश व्यास अनुनय

1 Like · 2 Comments · 196 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
आंखन तिमिर बढ़ा,
आंखन तिमिर बढ़ा,
Mahender Singh
काम चलता रहता निर्द्वंद्व
काम चलता रहता निर्द्वंद्व
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
अब छोड़ दिया है हमने तो
अब छोड़ दिया है हमने तो
gurudeenverma198
याद कब हमारी है
याद कब हमारी है
Shweta Soni
चाँदनी रातों में बसी है ख़्वाबों का हसीं समां,
चाँदनी रातों में बसी है ख़्वाबों का हसीं समां,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
लोग महापुरुषों एवम् बड़ी हस्तियों के छोटे से विचार को भी काफ
लोग महापुरुषों एवम् बड़ी हस्तियों के छोटे से विचार को भी काफ
Rj Anand Prajapati
राष्ट्र सेवा के मौनव्रती श्री सुरेश राम भाई
राष्ट्र सेवा के मौनव्रती श्री सुरेश राम भाई
Ravi Prakash
किसे फर्क पड़ता है
किसे फर्क पड़ता है
Sangeeta Beniwal
लोग ऐसे दिखावा करते हैं
लोग ऐसे दिखावा करते हैं
ruby kumari
सुनो स्त्री,
सुनो स्त्री,
Dheerja Sharma
कड़वा सच
कड़वा सच
Sanjeev Kumar mishra
ममतामयी मां
ममतामयी मां
SATPAL CHAUHAN
* गीत कोई *
* गीत कोई *
surenderpal vaidya
बात-बात पर क्रोध से, बढ़ता मन-संताप।
बात-बात पर क्रोध से, बढ़ता मन-संताप।
डॉ.सीमा अग्रवाल
सुबह-सुबह की लालिमा
सुबह-सुबह की लालिमा
Neeraj Agarwal
■ सुन भी लो...!!
■ सुन भी लो...!!
*Author प्रणय प्रभात*
तुम्हीं मेरा रस्ता
तुम्हीं मेरा रस्ता
Monika Arora
!..............!
!..............!
शेखर सिंह
"संगठन परिवार है" एक जुमला या झूठ है। संगठन परिवार कभी नहीं
Sanjay ' शून्य'
खुदा रखे हमें चश्मे-बद से सदा दूर...
खुदा रखे हमें चश्मे-बद से सदा दूर...
shabina. Naaz
जन्म से मरन तक का सफर
जन्म से मरन तक का सफर
Vandna Thakur
Game of the time
Game of the time
Mangilal 713
ज़िंदगी क्या है ?
ज़िंदगी क्या है ?
Dr fauzia Naseem shad
काश कही ऐसा होता
काश कही ऐसा होता
Swami Ganganiya
*जब तू रूठ जाता है*
*जब तू रूठ जाता है*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
"रचो ऐसा इतिहास"
Dr. Kishan tandon kranti
इस जमाने जंग को,
इस जमाने जंग को,
Dr. Man Mohan Krishna
मन मूरख बहुत सतावै
मन मूरख बहुत सतावै
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
सनातन सँस्कृति
सनातन सँस्कृति
Bodhisatva kastooriya
शामें दर शाम गुजरती जा रहीं हैं।
शामें दर शाम गुजरती जा रहीं हैं।
शिव प्रताप लोधी
Loading...