Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Feb 2024 · 1 min read

क्षणिका : ऐश ट्रे

क्षणिका : ऐश ट्रे

पी लिया
हर दर्द तेरी बेवफ़ाई का
मैने सिगरेट के हर कश के साथ
झाड़ दिये सब लम्हे
झूठी कसमों के
वक्त की ऐश ट्रे में
सिगरेट की राख की तरह

सुशील सरना / 27-2-24

42 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
चाहत ए मोहब्बत में हम सभी मिलते हैं।
चाहत ए मोहब्बत में हम सभी मिलते हैं।
Neeraj Agarwal
बदल चुका क्या समय का लय?
बदल चुका क्या समय का लय?
Buddha Prakash
जाति आज भी जिंदा है...
जाति आज भी जिंदा है...
आर एस आघात
तुम जो कहते हो प्यार लिखूं मैं,
तुम जो कहते हो प्यार लिखूं मैं,
Manoj Mahato
ज़रा पढ़ना ग़ज़ल
ज़रा पढ़ना ग़ज़ल
Surinder blackpen
सरकारी नौकरी
सरकारी नौकरी
कवि दीपक बवेजा
पहाड़ पर बरसात
पहाड़ पर बरसात
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
💐प्रेम कौतुक-260💐
💐प्रेम कौतुक-260💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
"चाहत " ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
Jeevan ke is chor pr, shanshon ke jor pr
Jeevan ke is chor pr, shanshon ke jor pr
Anu dubey
दिल का दर्द आँख तक आते-आते नीर हो गया ।
दिल का दर्द आँख तक आते-आते नीर हो गया ।
Arvind trivedi
धरती का बेटा गया,
धरती का बेटा गया,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
वो ही प्रगति करता है
वो ही प्रगति करता है
gurudeenverma198
करूँ प्रकट आभार।
करूँ प्रकट आभार।
Anil Mishra Prahari
अधरों पर शतदल खिले, रुख़ पर खिले गुलाब।
अधरों पर शतदल खिले, रुख़ पर खिले गुलाब।
डॉ.सीमा अग्रवाल
दोस्त कहता है मेरा खुद को तो
दोस्त कहता है मेरा खुद को तो
Seema gupta,Alwar
अरदास मेरी वो
अरदास मेरी वो
Mamta Rani
3218.*पूर्णिका*
3218.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
*मिट्टी की वेदना*
*मिट्टी की वेदना*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
हम जितने ही सहज होगें,
हम जितने ही सहज होगें,
लक्ष्मी सिंह
कर्म-धर्म
कर्म-धर्म
चक्षिमा भारद्वाज"खुशी"
कर रही हूँ इंतज़ार
कर रही हूँ इंतज़ार
Rashmi Ranjan
ये दुनिया है कि इससे, सत्य सुना जाता नहीं है
ये दुनिया है कि इससे, सत्य सुना जाता नहीं है
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
"जियो जिन्दगी"
Dr. Kishan tandon kranti
खाता काल मनुष्य को, बिछड़े मन के मीत (कुंडलिया)
खाता काल मनुष्य को, बिछड़े मन के मीत (कुंडलिया)
Ravi Prakash
👍
👍
*Author प्रणय प्रभात*
सब तो उधार का
सब तो उधार का
Jitendra kumar
उस रात .....
उस रात .....
sushil sarna
उठाना होगा यमुना के उद्धार का बीड़ा
उठाना होगा यमुना के उद्धार का बीड़ा
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
जन अधिनायक ! मंगल दायक! भारत देश सहायक है।
जन अधिनायक ! मंगल दायक! भारत देश सहायक है।
Neelam Sharma
Loading...