Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Jul 2023 · 1 min read

किसी आंख से आंसू टपके दिल को ये बर्दाश्त नहीं,

किसी आंख से आंसू टपके दिल को ये बर्दाश्त नहीं,
एक ज़रा सी बारिश में दिल मिट्टी सा गल जाता है।
अश्क़ किसी के पोंछ के अपने रुसवा होने की रूदाद,
जिस काग़ज़ पर लिख देता हूं वो काग़ज़ जल जाता है।।
■प्रणय प्रभात■

2 Likes · 221 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जीवन की आपाधापी में, न जाने सब क्यों छूटता जा रहा है।
जीवन की आपाधापी में, न जाने सब क्यों छूटता जा रहा है।
Gunjan Tiwari
रंगीन हुए जा रहे हैं
रंगीन हुए जा रहे हैं
हिमांशु Kulshrestha
लोककवि रामचरन गुप्त के पूर्व में चीन-पाकिस्तान से भारत के हुए युद्ध के दौरान रचे गये युद्ध-गीत
लोककवि रामचरन गुप्त के पूर्व में चीन-पाकिस्तान से भारत के हुए युद्ध के दौरान रचे गये युद्ध-गीत
कवि रमेशराज
🧟☠️अमावस की रात ☠️🧟
🧟☠️अमावस की रात ☠️🧟
SPK Sachin Lodhi
धुंध इतनी की खुद के
धुंध इतनी की खुद के
Atul "Krishn"
सर्जिकल स्ट्राइक
सर्जिकल स्ट्राइक
लक्ष्मी सिंह
*रामपुर की गाँधी समाधि (तीन कुंडलियाँ)*
*रामपुर की गाँधी समाधि (तीन कुंडलियाँ)*
Ravi Prakash
जीवन सुंदर गात
जीवन सुंदर गात
Kaushlendra Singh Lodhi Kaushal
कालजयी रचनाकार
कालजयी रचनाकार
Shekhar Chandra Mitra
मीलों का सफर तय किया है हमने
मीलों का सफर तय किया है हमने
कवि दीपक बवेजा
लोग हमसे ख़फा खफ़ा रहे
लोग हमसे ख़फा खफ़ा रहे
Surinder blackpen
परों को खोल कर अपने उड़ो ऊँचा ज़माने में!
परों को खोल कर अपने उड़ो ऊँचा ज़माने में!
धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफ़िर
2311.
2311.
Dr.Khedu Bharti
मुझे दूसरे के अखाड़े में
मुझे दूसरे के अखाड़े में
*Author प्रणय प्रभात*
धीरे-धीरे रूप की,
धीरे-धीरे रूप की,
sushil sarna
हाँ, तैयार हूँ मैं
हाँ, तैयार हूँ मैं
gurudeenverma198
फागुन में.....
फागुन में.....
Awadhesh Kumar Singh
दूसरों के अनुभव से लाभ उठाना भी एक अनुभव है। इसमें सत्साहित्
दूसरों के अनुभव से लाभ उठाना भी एक अनुभव है। इसमें सत्साहित्
Dr. Pradeep Kumar Sharma
लाख़ ज़ख्म हो दिल में,
लाख़ ज़ख्म हो दिल में,
पूर्वार्थ
अज्ञात है हम भी अज्ञात हो तुम भी...!
अज्ञात है हम भी अज्ञात हो तुम भी...!
Aarti sirsat
......मंजिल का रास्ता....
......मंजिल का रास्ता....
Naushaba Suriya
आंख से गिरे हुए आंसू,
आंख से गिरे हुए आंसू,
नेताम आर सी
श्रीराम गिलहरी संवाद अष्टपदी
श्रीराम गिलहरी संवाद अष्टपदी
SHAILESH MOHAN
पुश्तैनी दौलत
पुश्तैनी दौलत
Satish Srijan
"निगाहें"
Dr. Kishan tandon kranti
न थक कर बैठते तुम तो, ये पूरा रास्ता होता।
न थक कर बैठते तुम तो, ये पूरा रास्ता होता।
सत्य कुमार प्रेमी
चंद्र ग्रहण के बाद ही, बदलेगी तस्वीर
चंद्र ग्रहण के बाद ही, बदलेगी तस्वीर
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
आज़ाद हूं मैं
आज़ाद हूं मैं
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
कांग्रेस की आत्महत्या
कांग्रेस की आत्महत्या
Sanjay ' शून्य'
कविता कि प्रेम
कविता कि प्रेम
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
Loading...